नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
बेगूसराय। बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और प्रमुख रेलवे माल गोदाम था, जिसे हाल ही में रेलवे स्टेशन के विस्तार कार्य के कारण 66 साल के संचालन के बाद बंद कर दिया गया है। बरौनी माल गोदाम का बंद होना केवल रेल पटरियों का विस्तार नहीं है, बल्कि यह उन सैकड़ों परिवारों के लिए आंधी जैसा है जो इसी से अपना घर चलाते थे। जिस गोदाम ने रेलवे की झोली में चंद महीनों में करोड़ों रुपये का राजस्व भर दिया, आज वहां सूनापन छा गया है। रोज मजदूरी कर परिवार पालने वालों के हाथ अब खाली हो गए हैं। ट्रकों के पहिए थमने से ट्रांसपोर्टरों की कमाई पर ताला लग गया है। आसपास की छोटी दुकानें और ढाबे भी इस बंदी की मार झेल रहे हैं। रेलवे का आधुनिकीकरण और फ्रेट कॉरिडोर देश के लिए जरूरी है, लेकिन क्या इन मेहनतकशों के भविष्य की कोई सुध ली जाएगी? यह सवाल आज हर पीड़ित के मन में है।
रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच बरौनी माल गोदाम ने करीब 2.70 लाख मीट्रिक टन माल का प्रबंधन किया, जिससे विभाग को 31 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। 1959 से संचालित यह गुड्स शेड इस क्षेत्र का एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब रहा है। हालांकि, इसके बंद होने की हालिया खबरों के बाद स्थानीय सप्लाई चेन और ट्रांसपोर्ट बिजनेस से जुड़े हितधारकों में चिंता है। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़े श्रम बाजार और माल ढुलाई के कारोबार पर व्यापक व्यावसायिक असर पड़ेगा।
जानकारों के अनुसार, बरौनी गुड्स शेड की शुरुआत करीब वर्ष 1959 में हुई थी। एक समय यहां देश के विभिन्न राज्यों से मालगाड़ियों के जरिये खाद्य सामग्री समेत अन्य सामान पहुंचता था। माल की लोडिंग और अनलोडिंग से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता था माल गोदाम बंद होने का सीधा असर यहां काम करने वाले मजदूरों पर पड़ेगा। इसके अलावा सैकड़ों ट्रक संचालक, चालक, खलासी और ट्रांसपोर्टर भी प्रभावित होंगे। माल की ढुलाई से जुड़े कारोबार पर रोक लगने से इन लोगों की आय प्रभावित होने की आशंका है।
रेलवे के विकास कार्यों ने एक तरफ जहां आधुनिकीकरण की गति बढ़ाई है, वहीं दूसरी तरफ बरौनी के व्यापारिक जगत को बड़ा झटका दिया है। पिछले 16 महीनों में 36 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व देने वाले इस माल गोदाम से सिर्फ माल नहीं, बल्कि क्षेत्रीय रोजगार की उम्मीदें भी जुड़ी थीं। रेलवे के इस फैसले से जहां रैक परिवहन बंद हुआ है, वहीं आसपास के परिवहन कारोबार और स्थानीय बाजारों में भारी मंदी की आशंका जताई जा रही है। सवाल यह है कि क्या रेलवे के विस्तार की इस प्रक्रिया में स्थानीय रोजगार के विकल्पों पर भी विचार किया गया