नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
सहरसा। अगर आप कोर्ट जा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। वकीलों के हक और आपके भरोसे पर डाका डालने वाला एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। विधिवेत्ता संघ ने एक ऐसे शख्स को दबोचा है जो कथित तौर पर जाली प्रपत्र बेचकर वकीलों के कल्याण कोष को लाखों का नुकसान पहुंचा रहा था। कहते हैं शेर की मांद में जाकर शिकार नहीं किया जाता, लेकिन ज्योतिष चंद्र झा ने इस कहावत को पुराना साबित कर दिया।
उन्होंने जालसाजी की दुकान कहीं और नहीं, बल्कि सीधे सहरसा जिला विधिवेत्ता संघ के परिसर में ही खोल ली। वकीलों की नाक के नीचे ही वह धड़ल्ले से जाली वकालतनामा और बंध पत्र बेच रहे थे। शायद उनका मानना था कि ‘दीये तले सबसे ज्यादा अंधेरा होता है’। वकीलों के बीच ही फर्जी दस्तावेज बेचने की इस हिम्मत ने पूरे कोर्ट परिसर में हड़कंप मचा दिया।
सहरसा कोर्ट परिसर में उस समय सच साबित होता दिखा, जब सहरसा जिला विधिवेत्ता संघ ने अचानक एक गुप्त सूचना के आधार पर संघ के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने जाल बिछाकर अधिवक्ता उपेंद्र झा के टेबल के पास से एक संदिग्ध शख्स को दबोच लिया। जब उसके बैग की तलाशी ली गई, तो वहां मौजूद वकीलों के होश उड़ गए। आरोपी ज्योतिष चंद्र झा के बैग से 58 जाली बेल बॉन्ड और 22 जाली वकालतनामा बरामद किए गए। इतना ही नहीं, उसके फोन को खंगालने पर वकालतनामा के डिजिटल स्कैन कॉपियां भी पाई गईं। आरोपी अब तक न जाने कितने लोगों को कोर्ट-कचहरी के नाम पर चूना लगा चुका है।
आरोपी के पास से ₹900 नकद और कुछ संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिन्हें जांच के लिए पुलिस को सौंप दिया गया है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इस खेल में और कौन-कौन शामिल है। संघ के महासचिव कृष्ण मुरारी प्रसाद द्वारा सदर थानाध्यक्ष को दिए गए लिखित आवेदन में वित्तीय नुकसान और धोखाधड़ी का हवाला देते हुए कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
संघ का मानना है कि इस फर्जीवाड़े से अधिवक्ता कल्याण मद को राजस्व की भारी हानि हुई है। पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बरामद मोबाइल, स्कैन प्रपत्रों और अन्य साक्ष्यों की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, तफ्तीश पूरी होने के बाद ही रैकेट के नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।