बेताब अहमद
पटना। नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने काठमांडू में महाराष्ट्र के 100 तीर्थयात्रियों की सांसें अटका दी थीं। चारों तरफ पानी और संकट का पहरा था। महाराष्ट्र के इन लोगों की उम्मीदें टूटने लगी थीं, तभी बिहार सरकार उनके लिए संकटमोचक बनकर सामने आई। ऐसे मुश्किल वक्त में महाराष्ट्र और बिहार की सरकारों ने मिलकर एक बेहतरीन मानवीय मिसाल पेश की।
सीतामढ़ी जिला प्रशासन ने फुर्ती दिखाते हुए सभी यात्रियों को नेपाल सीमा से सुरक्षित बाहर निकाला।थके-हारे यात्रियों के लिए सीतामढ़ी और पटना में गर्म भोजन, पानी और रहने की खास व्यवस्था की गई। डॉक्टरों की टीम ने सभी तीर्थयात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया ताकि किसी को तकलीफ न हो।
महाराष्ट्र सरकार को जैसे ही काठमांडू में तीर्थयात्रियों के फंसने की सूचना मिली, उसने बिना देर किए बिहार सरकार और रेलवे अधिकारियों से संपर्क किया। बिहार के मुख्य सचिव ने रेलवे बोर्ड से बात करके पटना-पूर्णा एक्सप्रेस में दो अतिरिक्त डिब्बे जुड़वाए। 29 अगस्त की सुबह सभी यात्री सुरक्षित ट्रेन में बैठकर अपने घर महाराष्ट्र के लिए रवाना हो गए।
बिहार की इस संवेदनशीलता और अपनापन भरे व्यवहार को देखकर तीर्थयात्रियों की आँखें भर आईं। उन्होंने राहत कार्यों में जुटे सभी अधिकारियों और बिहार के लोगों को दिल से धन्यवाद दिया। इसे महाराष्ट्र और बिहार सरकारों के बीच बेहतरीन तालमेल और सफल प्रशासनिक सहयोग की एक बड़ी मिसाल के रूप में दिखा जा सकता है।