निर्धारित दर पर यूरिया-डीएपी उपलब्ध कराने की मांग, प्रखंड कृषि पदाधिकारी को सौंपा मांग पत्र
नवबिहार टाइम्स संवाददाता
मसौढ़ी। उर्वरकों की अनिवार्य टैगिंग के विरोध में पुनपुन प्रखंड के उर्वरक विक्रेताओं ने खाद का उठाव बंद करने का निर्णय लिया है। प्रखंड कृषि कार्यालय परिसर में रिटेलर फर्टिलाइजर एंड फार्मर वेलफेयर फाउंडेशन के बैनर तले विक्रेताओं की बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से थोक विक्रेताओं से उर्वरक का उठाव नहीं करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद विक्रेताओं ने प्रदर्शन कर प्रखंड कृषि पदाधिकारी को मांग पत्र सौंपा।
फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रेम कुमार ने आरोप लगाया कि थोक विक्रेताओं द्वारा यूरिया और डीएपी निर्धारित सरकारी दर पर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। उनके अनुसार यूरिया 242 रुपये तथा डीएपी 1250 रुपये की निर्धारित दर के बजाय अन्य उर्वरकों की टैगिंग कर उन्हें जबरन बेचने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे खुदरा विक्रेताओं के साथ किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विक्रेताओं का कहना है कि किसान अपनी जरूरत के अनुसार यूरिया और डीएपी खरीदना चाहते हैं, लेकिन टैगिंग के कारण उन्हें अतिरिक्त उर्वरक लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और खाद वितरण की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
विक्रेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक निर्धारित दर पर यूरिया-डीएपी उपलब्ध कराने और अन्य उर्वरकों की अनिवार्य टैगिंग की व्यवस्था समाप्त करने की मांग पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे थोक विक्रेताओं से किसी भी प्रकार के उर्वरक का उठाव नहीं करेंगे।
उन्होंने कृषि विभाग से मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान कराने की मांग की। विक्रेताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती और खाद का उठाव प्रभावित होने से किसानों को परेशानी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित कृषि पदाधिकारियों की होगी।