दवाओं के सुरक्षित और तर्कसंगत उपयोग के लिए एडीआर रिपोर्टिंग को नियमित कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाने पर जोर
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
सासाराम। नारायण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जमुहार के औषधि विज्ञान (फार्माकोलॉजी) विभाग स्थित प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रिया निगरानी केंद्र में छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह का गरिमामय समारोह के बीच शुभारंभ हुआ। 17 से 23 सितंबर 2026 तक चलने वाले इस सप्ताह का आयोजन फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया एवं भारतीय फार्माकोपिया आयोग, गाजियाबाद के तत्वावधान में किया जा रहा है।
इस वर्ष आयोजन की थीम “औषधि सतर्कता के माध्यम से दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना : सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा की दिशा में एक कदम” रखी गई है। सप्ताहभर आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, मेडिकल विद्यार्थियों और आम लोगों को दवाओं के सुरक्षित एवं तर्कसंगत इस्तेमाल तथा प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रियाओं की पहचान और उनकी रिपोर्टिंग के प्रति जागरूक किया जाएगा।

समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) एम.के. सिंह, पूर्व कुलपति-सह-सलाहकार रहे। इस अवसर पर डॉ. आकांक्षा कुमारी, निदेशक (मेडिकल), प्रो. (डॉ.) पुनीत कुमार सिंह, प्राचार्य, नारायण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, प्रो. (डॉ.) बिनोद शंकर सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, प्रो. (डॉ.) जितेंद्र कुमार, विभागाध्यक्ष, जनरल मेडिसिन, प्रो. (डॉ.) मनीष कुमार, विभागाध्यक्ष, जनरल सर्जरी, प्रो. (डॉ.) आर.के. श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, माइक्रोबायोलॉजी, प्रो. (डॉ.) राकेश कुमार, माइक्रोबायोलॉजी, डॉ. सौरभ कुमार, सहायक प्राध्यापक, माइक्रोबायोलॉजी, गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र नारायण सिंह तथा सहायक कुलसचिव अजय कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ चिकित्सक, शिक्षक, रेजिडेंट डॉक्टर, इंटर्न्स और एमबीबीएस विद्यार्थी मौजूद रहे।
फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं एडीआर मॉनिटरिंग सेंटर के समन्वयक प्रो. (डॉ.) मृगेन्द्र कुमार ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने फार्माकोविजिलेंस की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए एडीआर की पहचान, रिपोर्टिंग की आवश्यकता, कौन एडीआर रिपोर्ट कर सकता है तथा रिपोर्ट किसे और किस प्रकार की जा सकती है, इसकी जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि दवाओं के इस्तेमाल के दौरान सामने आने वाली प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की समय पर रिपोर्टिंग से दवाओं से जुड़े संभावित जोखिमों की पहचान करने में मदद मिलती है। इससे भविष्य में मरीजों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, अन्य स्वास्थ्यकर्मियों और विद्यार्थियों से एडीआर रिपोर्टिंग को अपनी नियमित व्यावसायिक जिम्मेदारी का हिस्सा बनाने की अपील की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एडीआर की रिपोर्टिंग किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की सामूहिक पहल है।
कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक एवं रोचक बनाने के लिए प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के स्नातकोत्तर रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए फार्माकोविजिलेंस एवं औषधि विज्ञान विषय पर क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
डॉ. सार्थक, डॉ. अनन्या प्रिया एवं डॉ. नेहा की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि डॉ. निकिता, डॉ. अनन्या एवं डॉ. सिमरन की टीम द्वितीय स्थान पर रही। विजेता प्रतिभागियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. वैभव कुमार श्रीवास्तव, डॉ. दीपिका लक्ष्मी एवं अदिति परमार ने किया। आयोजन में एमबीबीएस 2024 बैच के विद्यार्थियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. एस. एमाइल शंकर, डॉ. दानिश जमाल, डॉ. दीपिका, डॉ. आशीष रंजन, डॉ. दया शंकर सिंह, डॉ. जय प्रकाश चौधरी, डॉ. शिव शंकर प्रसाद, डॉ. अमित गुप्ता, डॉ. रविनंदन कुमार रश्मि, डॉ. अविनाश प्रताप, डॉ. मुकेश कुमार एवं संदीप कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समापन पर एडीआर मॉनिटरिंग सेंटर के उप-समन्वयक डॉ. वैभव कुमार श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, वरिष्ठ संकाय सदस्यों, आयोजन समिति, रेजिडेंट डॉक्टरों और विद्यार्थियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने नारायण मेडिकल कॉलेज के छात्र अनुभाग की पूरी टीम के सहयोग और सक्रिय सहभागिता के लिए विशेष धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों से एडीआर की पहचान एवं रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने तथा सुरक्षित और तर्कसंगत औषधि उपयोग का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया गया। आयोजन के माध्यम से यह संदेश प्रमुखता से दिया गया।