खटाल की जमीन पर माफियाओं की नजर होने का लगाया आरोप, बाबाओं के लिए आचार संहिता और पुलिस सत्यापन की उठाई मांग
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
धनबाद। पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने धनबाद के बारामुड़ी खटाल विवाद को लेकर बड़ा राजनीतिक ऐलान किया है। उन्होंने खटाल में रहने वाले लोगों के समर्थन में खुलकर उतरने और उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ने का भरोसा दिया। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि गरीबों के आशियाने को उजाड़ने की कोशिश हुई तो आर-पार की लड़ाई होगी। जरूरत पड़ी तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
धनबाद पहुंचने पर पप्पू यादव ने कहा कि बारामुड़ी खटाल का मामला किसी एक जाति या समाज का नहीं, बल्कि गरीबों के घर, रोजगार और अधिकार से जुड़ा है। वहां यादव समाज के अलावा अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अति पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक और अन्य वर्गों के लोग भी रहते हैं। ऐसे में किसी भी कार्रवाई से हजारों परिवार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वर्षों पहले सरकारी नीति के तहत लोगों को वहां बसाया गया था, तो आज उन्हें हटाने की नौबत क्यों आ रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि खटाल की अरबों रुपये की जमीन पर माफियाओं की नजर है और गरीबों को हटाकर जमीन पर कब्जा करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी इस मामले से अवगत हैं।

सांसद ने कहा कि गरीबों का शोषण करने वाले और माफियाओं के साथ मिलकर काम करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों से दलगत भावना से ऊपर उठकर खटाल के लोगों के समर्थन में आने की अपील की। इस दौरान पप्पू यादव ने बिहार की कानून व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अपराध बढ़ रहे हैं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वहीं, बागेश्वर धाम के बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने उन्हें भाजपा का प्रायोजित चेहरा बताया। उन्होंने धार्मिक उपदेश देने वाले बाबाओं के लिए आचार संहिता लागू करने, पुलिस सत्यापन कराने और उनकी जवाबदेही तय करने की मांग की। राम रहीम, आसाराम, नित्यानंद और रामपाल जैसे विवादित नामों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के कारण संत परंपरा की छवि प्रभावित होती है। पप्पू यादव के इन बयानों के बाद बारामुड़ी खटाल विवाद को लेकर धनबाद का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। अब उनके आंदोलन के ऐलान और प्रशासनिक कार्रवाई पर इसके संभावित असर को लेकर निगाहें टिकी हैं।