नवबिहार टाइम्स संवाददाता
मोकामा। हरिद्वार की हर की पौड़ी की तर्ज पर विकसित बेगूसराय के सिमरिया रिवर फ्रंट में गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद सीढ़ियों और किनारे के कुछ हिस्सों में टूट-फूट एवं धंसाव की तस्वीरें सामने आई हैं। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना की संरचनाओं में क्षति के बाद निर्माण गुणवत्ता और इंजीनियरिंग डिजाइन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने क्षतिग्रस्त हिस्सों की विशेषज्ञों की टीम से तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
सिमरिया गंगा घाट को आधुनिक और आकर्षक स्वरूप देने के उद्देश्य से वर्ष 2023 में रिवर फ्रंट परियोजना का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। इसके तहत घाट की सीढ़ियों के साथ चेंजिंग रूम, आरती स्थल, शेड, शौचालय सहित श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की गईं। निर्माण के दौरान सिमरिया घाट को हरिद्वार की हर की पौड़ी से भी बेहतर स्वरूप देने का दावा किया गया था।
हालांकि, गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद सीढ़ियों और किनारे के हिस्सों में क्षति सामने आने से परियोजना की मजबूती पर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा के जलस्तर में मौसमी उतार-चढ़ाव और नदी के कटाव की प्रकृति को ध्यान में रखकर निर्माण किया गया था या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए।
वर्ष 2025 में बिहार विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, सिमरिया रिवर फ्रंट परियोजना पर 137.56 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की बात सामने आई थी। परियोजना के दूसरे चरण का कार्य भी प्रस्तावित है। ऐसे में पहले चरण में निर्मित संरचनाओं में क्षति सामने आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के पालन को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि संबंधित विभाग विशेषज्ञ अभियंताओं की टीम गठित कर स्थल का निरीक्षण कराए। जांच में निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, संरचनाओं की मजबूती, डिजाइन और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुपालन की पड़ताल की जाए।
विशेषज्ञों की तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सीढ़ियों और किनारे के हिस्सों में क्षति गंगा के बढ़ते जलस्तर, प्राकृतिक कटाव अथवा डिजाइन और निर्माण गुणवत्ता से जुड़े किसी तकनीकी कारण से हुई है।
फिलहाल रिवर फ्रंट की क्षतिग्रस्त संरचनाओं की तस्वीरों ने परियोजना की मजबूती को लेकर बहस छेड़ दी है। अब देखना है कि संबंधित विभाग इस मामले में तकनीकी जांच कराकर नुकसान की वास्तविक वजह सामने लाता है या नहीं।