नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
वैशाली/पटना। समाजसेवी, शिक्षाविद् एवं कैरियर मिशन कंप्यूटर अकादमी के निदेशक डॉ. आनंद रंजन झा ने कहा है कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास किसी भी जनप्रतिनिधि और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति की सबसे बड़ी पूंजी होती है। जो लोग समय, परिस्थिति और स्वार्थ के अनुसार अपने विचार, सिद्धांत और निष्ठा बदलते रहते हैं, वे अंततः जनता का विश्वास खो देते हैं।
डॉ. झा ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है, जो हर परिस्थिति में अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर अडिग रहे। उन्होंने कहा कि अवसरवाद, दोहरी नीति और बार-बार बदलते राजनीतिक चरित्र से लोकतांत्रिक मूल्यों को गहरा आघात पहुंचता है। आज की जागरूक जनता केवल भाषणों से प्रभावित नहीं होती, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, कार्यशैली और जनसेवा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता के आधार पर अपना निर्णय करती है।
उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि व्यक्ति का चरित्र परिस्थितियों के अनुसार नहीं बदलना चाहिए। इसी संदेश को उन्होंने अपनी कविता “मौसम नहीं, मौकापरस्त हो तुम” के माध्यम से अभिव्यक्त किया। कविता में उन्होंने स्वार्थ, अवसरवाद, सिद्धांतहीन राजनीति और बदलते राजनीतिक चरित्र पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि समय और इतिहास दोनों ही व्यक्ति के वास्तविक चरित्र का मूल्यांकन करते हैं तथा अंततः सम्मान उसी को मिलता है जो अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करता।
डॉ. आनंद रंजन झा ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सिद्धांतनिष्ठ और जनसेवा के प्रति समर्पित नेतृत्व आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनता ही लोकतंत्र की सर्वोच्च निर्णायक है और समय हर व्यक्ति की निष्ठा, ईमानदारी तथा चरित्र की परीक्षा अवश्य लेता है। इतिहास भी उन्हीं लोगों को सम्मान देता है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों और सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं।
उन्होंने नागरिकों से भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा चरित्रवान और सिद्धांतनिष्ठ नेतृत्व का समर्थन करने का आह्वान किया।