देशरत्न राजेंद्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में बी.एड. सत्र 2026–28 के नवप्रशिक्षुओं का स्वागत एवं परिचय समारोह आयोजित
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पटना। बिहार विद्यापीठ द्वारा संचालित देशरत्न राजेंद्र प्रसाद शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सदाकत आश्रम में सोमवार को बी.एड. सत्र 2026–2028 के नवनामांकित प्रशिक्षुओं के स्वागत एवं परस्पर परिचय समारोह का आयोजन किया गया। समारोह का उद्देश्य नवप्रशिक्षुओं को बिहार विद्यापीठ की गौरवशाली परंपरा, महाविद्यालय की कार्यसंस्कृति, शैक्षणिक अनुशासन तथा शिक्षक-प्रशिक्षण की मूल भावना से परिचित कराना था।
समारोह की अध्यक्षता बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी विजय प्रकाश ने की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में बिहार विद्यापीठ ने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज भी देश को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “शिक्षक केवल ज्ञान का संप्रेषक नहीं, बल्कि समाज एवं राष्ट्र निर्माण का शिल्पकार होता है।” उन्होंने नवप्रवेशित प्रशिक्षुओं का स्वागत करते हुए उनसे बिहार विद्यापीठ के आदर्शों एवं मूल्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

बिहार विद्यापीठ के सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. राणा अवधेश ने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए प्रसिद्ध प्रेरणादायी गीत “हम लाए हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल कर, इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल कर” की पंक्तियाँ उद्धृत कीं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के भविष्य का निर्माण शिक्षकों के हाथों होता है, इसलिए प्रत्येक प्रशिक्षु को समर्पण, संवेदनशीलता और राष्ट्रभावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
शिक्षा निदेशक डॉ. मृदुला प्रकाश ने बताया कि विभिन्न क्षमता वाले बच्चों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से स्थापित स्कूल ऑफ क्रिएटिव लर्निंग की नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों का लाभ महाविद्यालय के प्रशिक्षुओं को भी मिलेगा। उन्होंने शिक्षक-प्रशिक्षण में नियमित एवं शत-प्रतिशत उपस्थिति पर विशेष बल दिया।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. पूनम वर्मा ने प्रशिक्षुओं का स्वागत करते हुए महाविद्यालय के नियम, अनुशासन एवं शैक्षणिक व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नियमित उपस्थिति, समयपालन और अनुशासित शैक्षणिक जीवन ही एक सफल शिक्षक की पहचान है।
बिहार विद्यापीठ के संयुक्त सचिव अवधेश के. नारायण ने कहा कि शिक्षक-प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल एवं व्यवहारगत परिवर्तन का समन्वित विकास है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से आधुनिक शिक्षण तकनीकों, नवाचार आधारित शिक्षण एवं शिक्षक की गरिमामयी जीवनशैली को अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर अटल इन्क्यूबेशन सेंटर, बिहार विद्यापीठ फाउंडेशन के मुख्य परिचालन पदाधिकारी प्रमोद कुमार कर्ण ने प्रशिक्षुओं को टिंकरिंग लैब एवं नवाचार आधारित गतिविधियों की जानकारी देते हुए प्रयोगात्मक शिक्षण की महत्ता बताई।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. प्रतिमा कुमारी, डॉ. रीना चौधरी, मिताली मित्रा, डॉ. शादिमा शाहीन, रजनी रंजन, प्रेरणा कुमारी, विकास कुमार, कंचन कुमारी, सौरभ भारद्वाज एवं रीम्पल कुमारी ने अपने-अपने विषयों की उपयोगिता, पाठ्यक्रम की संरचना तथा शिक्षक-प्रशिक्षण की अपेक्षाओं पर प्रकाश डाला।
महाविद्यालय के कार्यालय कर्मियों, पुस्तकालयाध्यक्ष एवं अन्य कर्मचारियों ने भी अपना परिचय देते हुए प्रशिक्षुओं को उपलब्ध सेवाओं एवं दायित्वों की जानकारी दी। सभी नवप्रशिक्षुओं ने अपना परिचय देते हुए समर्पण, अनुशासन एवं उत्कृष्टता के साथ प्रशिक्षण पूरा करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक रीम्पल कुमारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रतिमा कुमारी ने किया। समारोह आत्मीय, प्रेरणादायी एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।