बेताब अहमद
नासरीगंज, रोहतास। मानवता और आपसी सहयोग की एक मिसाल बिहार राज्य के रोहतास जिला के नासरीगंज के वार्ड चार में देखने को मिली, जहां एक जर्जर खपरैल घर गिरने से मलबे में दबे दो मासूमों को पड़ोसियों ने अपनी जान पर खेलकर सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
तेज बारिश के बीच जब अचानक घर की छत गिरी, तो उसमें सो रहे मो. समीर के इकलौते बेटे और बेटी मलबे में आधे घंटे तक दबे रह गए। करीब आधे घंटे तक पूरा इलाका दहशत में था और पिता भी बच्चों के जीवित बचने की उम्मीद खो चुके थे। लेकिन आपदा की इस घड़ी में पड़ोसियों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने तुरंत एक रेस्क्यू अभियान शुरू किया और कड़ी मशक्कत के बाद दोनों बच्चों को मलबे से जिंदा बाहर खींच निकाला। डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को खतरे से बाहर बताया है। संकट के इस समय में पड़ोसियों की तत्परता ने साबित कर दिया कि आज भी इंसानियत जिंदा है।
मेहनत-मजदूरी कर पांच बेटियों और एक बेटे का पेट पालने वाले समीर अभी अपने पिता की मौत के सदमे और इलाज के कर्ज से उबर भी नहीं पाए थे कि कुदरत ने उनसे उनके रहने का आसरा भी छीन लिया। बारिश के बीच जब उनके घर की जर्जर छत ढही, तो समीर की आंखों के सामने अंधेरा छा गया। उनके कलेजे के टुकड़े इकलौता बेटा और एक बेटी मलबे में दबे थे। एक लाचार पिता अपनी बेबसी पर रो रहा था और बच्चों की जिंदगी की आस छोड़ चुका था। हालांकि, पड़ोसियों की मदद से बच्चों की जान तो बच गई, लेकिन अब इस गरीब परिवार के सामने सिर छुपाने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। रोते-बिलखते परिवार के पास इस मूसलाधार बारिश में सिर ढकने के लिए एक त्रिपाल तक नसीब नहीं हुआ है।
आर्थिक रूप से लाचार इस परिवार को नगर पंचायत से कॉलोनी आवास योजना की उम्मीद थी, लेकिन प्रशासन ने कोई पहल नहीं की। हद तो तब हो गई जब इतनी बड़ी घटना के बाद भी नगर पंचायत का कोई अधिकारी सुध लेने नहीं पहुँचा। पीड़ित परिवार इस कड़कड़ाती बारिश के मौसम में खुले आसमान के नीचे रहने को विवश है। सवाल उठता है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या गरीबों की मदद के लिए उसके पास कोई योजना नहीं है?