नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पटना/रांची। वजन बढ़ना और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं अब सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं रही हैं। छोटे शहरों और बिहार-झारखंड जैसे राज्यों में भी लोग वजन नियंत्रित करने और बेहतर मेटाबॉलिक हेल्थ को लेकर पहले से कहीं अधिक जागरूक हो रहे हैं। इसी बदलाव के बीच, प्रमुख फार्मा कंपनी सिप्ला के टिरजेपाटाइड ब्रांड ‘युरपीक’ ने बिहार और झारखंड में महीने-दर-महीने 20.8 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि इन राज्यों में अब लोग खुद से उपाय करने के बजाय डॉक्टर की सलाह से वैज्ञानिक और चिकित्सीय इलाज को तरजीह दे रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मरीजों की सोच में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। डायबिटीज और ओबेसिटी केयर सेंटर के प्रख्यात एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. सुभाष कुमार के अनुसार, मरीज अब क्रैश डाइट या जल्दी वजन घटाने के शॉर्टकट के पीछे नहीं भाग रहे हैं। मोटापा प्रबंधन के बाजार में सेमाग्लूटाइड आधारित कई ब्रांड्स की मौजूदगी के बावजूद, डॉक्टरों और मरीजों के बीच टिरज़ेपाटाइड आधारित इलाज अभी भी पहली पसंद बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके बेहतर क्लिनिकल परिणामों, चिकित्सकीय फायदों और इस्तेमाल के बढ़ते भरोसेमंद अनुभवों के कारण युरपीक की मांग बिहार और झारखंड में तेजी से बढ़ रही है।
डॉक्टरो का राय है कि “लोग अब सिर्फ जल्दी वजन कम करने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वे लंबे समय तक स्वस्थ रहने के बारे में सोच रहे हैं. मरीज पोषण, एक्सरसाइज, वजन और मेटाबॉलिक हेल्थ को लेकर डॉक्टरों से अधिक सवाल पूछ रहे हैं. यह बढ़ती जागरूकता एक बेहद अच्छा संकेत है।”