जंजीरा दियारा की पूरी आबादी ने किया पलायन, प्रखंड मुख्यालय में डाला डेरा, कसहा दियारा में भी हालात बिगड़े
नवबिहार टाइम्स संवाददाता
मोकामा। गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर से मोकामा में बाढ़ का संकट गहरा गया है। गंगा और टाल क्षेत्र जलप्लावित हो चुके हैं। हाथीदह, दरियापुर, औंटा, रामपुर डुमरा, नौरंगा जलालपुर, मालपुर, मरांची समेत कई पंचायतों के गांवों में पानी प्रवेश कर गया है। जंजीरा दियारा की पूरी आबादी सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर चुकी है। बड़ी संख्या में विस्थापित लोग प्रखंड मुख्यालय में डेरा डाले हुए हैं।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार हाथीदह में गंगा का जलस्तर हाई फ्लड लेवल के करीब पहुंच गया है। जलस्तर वर्ष 2021 के स्तर तक पहुंचने से दियारा और नदी किनारे बसे लोगों में भय का माहौल है। पशुपालकों के सामने चारा और पशुओं को सुरक्षित रखने की चुनौती है।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन अलर्ट है। शुक्रवार को बाढ़ एसडीएम कृष्णा जोशी ने तपस्वी घाट, निषाद टोला घाट, मरांची और आसपास के दियारा क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रखंड मुख्यालय में विस्थापित परिवारों से मुलाकात कर हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। खतरनाक घाटों पर बैरिकेडिंग कराई गई है। नाव, पॉलिथीन, सामुदायिक रसोई और मेडिकल टीम को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
अंचलाधिकारी लवली कुमारी ने बताया कि विस्थापितों को प्लास्टिक शीट और पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराया गया है। सामुदायिक रसोई भी शुरू कर दी गई है। कसहा दियारा में शुक्रवार रात से सामुदायिक रसोई शुरू करने की तैयारी है।
पूर्व मंत्री सह विधान पार्षद कार्तिक कुमार ने भी प्रखंड मुख्यालय पहुंचकर बाढ़ प्रभावितों से मुलाकात की और अधिकारियों से राहत व्यवस्था की जानकारी ली। वहीं, कसहा दियारा की मुख्य सड़क कट जाने से आवागमन प्रभावित है। ग्रामीणों ने बंद पड़े उप स्वास्थ्य केंद्र को तत्काल खोलने की मांग की है।