नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। जिला कृषि पदाधिकारी संदीप राज द्वारा रफीगंज प्रखंड अंतर्गत पौथु पंचायत का स्थलीय निरीक्षण कर जलजमाव से प्रभावित धान की फसल की स्थिति का जायजा लिया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि पौथु पंचायत क्षेत्र में लगभग 1,500 एकड़ में धान की फसल जलजमाव से प्रभावित हुई है। वर्तमान में खेतों में जमा पानी का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है।
जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि वर्तमान स्थिति में जलस्तर कम होने की प्रक्रिया जारी है। पानी पूरी तरह निकलने एवं खेतों की स्थिति सामान्य होने के उपरांत फसल क्षति का पुनः स्थलीय निरीक्षण एवं आवश्यक आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर फसल की वास्तविक स्थिति का समुचित मूल्यांकन किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान किसानों को जलजमाव से प्रभावित धान की फसल के संरक्षण एवं उचित पोषण प्रबंधन के संबंध में आवश्यक तकनीकी जानकारी भी दी गई। किसानों को सलाह दी गई कि जलजमाव की स्थिति में खेतों में तत्काल उर्वरक का प्रयोग न करें। सबसे पहले खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित करें तथा पानी निकलने के बाद ही फसल की स्थिति के अनुरूप उर्वरक एवं पोषक तत्वों का प्रयोग करें।
कृषि विभाग द्वारा किसानों को बताया गया कि पानी निकलने के बाद फसल की स्थिति एवं स्थानीय कृषि अनुशंसाओं के अनुरूप प्रति बीघा लगभग 10 से 12 किलोग्राम यूरिया तथा 5 से 6 किलोग्राम पोटाश का प्रयोग किया जा सकता है। यूरिया नाइट्रोजन की पूर्ति में सहायक है, जबकि पोटाश फसल की मजबूती एवं बेहतर विकास में उपयोगी होता है। किसानों को उर्वरकों का प्रयोग कृषि विशेषज्ञों की सलाह एवं फसल की वास्तविक स्थिति के अनुसार करने की अपील की गई।
जिला प्रशासन के निर्देश पर कृषि विभाग की टीम द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में फसल एवं जलजमाव की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रभावित किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पानी निकलने के बाद फसल की स्थिति का पुनः आकलन करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि जलजमाव की स्थिति में घबराने के बजाय कृषि विभाग द्वारा दिए जा रहे तकनीकी सुझावों का पालन करें तथा फसल से संबंधित किसी भी समस्या अथवा आवश्यक मार्गदर्शन के लिए संबंधित कृषि पदाधिकारी एवं कृषि कर्मियों से संपर्क करें।