नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
भागलपुर। हर वर्ष विनाशकारी बाढ़ और कटाव का दंश झेलने वाले भागलपुर, मुंगेर और आसपास के दियारा क्षेत्रों को अब स्थायी राहत दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। गंगा नदी के किनारे प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित मुंगेर-भागलपुर गंगा पथ (मरीन ड्राइव) केवल आवागमन का एक्सप्रेसवे नहीं रहेगा, बल्कि यह शहर और तटीय बस्तियों के लिए एक मजबूत ‘सुरक्षा बांध’ (सॉलिड प्रोटेक्शन बंड) के रूप में भी काम करेगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पथ निर्माण और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि मुंगेर से सुल्तानगंज होते हुए सबौर तक प्रस्तावित 83.33 किलोमीटर लंबे गंगा पथ को यथासंभव ‘एट-ग्रेड’ (धरातल पर गाइड वॉल और तटबंध के रूप में) डिजाइन किया जाए। इसका सीधा उद्देश्य यह है कि जब भी गंगा उफान पर आए, तो यह विशाल सड़क संरचना शहर सुरक्षा रिंग बांध की तरह काम करे और गंगा के अनियंत्रित फैलाव को रिहायशी व कृषि क्षेत्रों में जाने से रोक सके।
परियोजना के तकनीकी प्रारूप के अनुसार, मुंगेर-भागलपुर गंगा पथ को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है। इसमें पहला खंड मुंगेर से सुल्तानगंज तक 42 किलोमीटर और दूसरा खंड सुल्तानगंज से भागलपुर-सबौर तक 41.33 किलोमीटर लंबा होगा। पूरी परियोजना में एलिवेटेड संरचना की तुलना में एट-ग्रेड हिस्से को प्राथमिकता दी जा रही है। मुंगेर से सबौर तक 83.33 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित गंगा पथ (मरीन ड्राइव) को सुरक्षा बांध के रूप में विकसित करने की तैयारी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का स्पष्ट निर्देश: मरीन ड्राइव को यथा संभव ‘एट-ग्रेड’ (समतल बांधनुमा) बनाएं ताकि यह शहर की रक्षा दीवार बने दो चरणों में निर्माण: मुंगेर से सुल्तानगंज (42 किमी) और सुल्तानगंज से सबौर (41.33 किमी); कनेक्टिविटी और सुरक्षा दोनों को प्राथमिकता बक्सर से भागलपुर तक गंगा नियंत्रण के लिए बनेगा व्यापक मास्टर प्लान; नदी से गाद (सिल्ट) हटाने और ड्रेजिंग पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने एलाइनमेंट तय करने वाली तकनीकी एजेंसी को निर्देश दिया है कि सड़क का रूट इस प्रकार निर्धारित हो, जिससे यह अधिकतम जिला मार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों और गंगा पुलों से सीधे जुड़ सके। इससे जहां एक ओर मुंगेर से सबौर तक निर्बाध सुपरफास्ट कनेक्टिविटी मिलेगी, वहीं दूसरी ओर दियारा और तटीय इलाकों के लाखों लोगों को हर साल आने वाली बाढ़ से स्थायी सुरक्षा कवच मिल जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में मुंगेर के गंगटा और राघोपुर दौरे के दौरान बक्सर से भागलपुर तक गंगा के जलप्रवाह को नियंत्रित करने के लिए एक समग्र मास्टर प्लान तैयार करने की घोषणा की थी। उन्होंने रेखांकित किया कि गंगा की तलहटी में भारी मात्रा में जमा गाद (सिल्ट) बाढ़ की सबसे प्रमुख वजह है, जिससे नदी की जलधारण क्षमता लगातार घट रही है।
इस संकट से निपटने के लिए सरकार गंगा, कोसी और गंडक नदियों के वैज्ञानिक जल प्रबंधन, बड़े पैमाने पर ड्रेजिंग, सिल्ट निकासी और तटबंधों के उच्चीकरण पर काम कर रही है। गंगा पथ को बांध के रूप में विकसित करने की यह दोहरी रणनीति आवागमन को रफ्तार देने के साथ-साथ अंग क्षेत्र को बाढ़ मुक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।