बिहार विद्यापीठ के संस्थापक स्तंभ चतुरानन दास के पुण्य स्मरण दिवस पर सदाकत आश्रम में उमड़ी श्रद्धा
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पटना। स्वाधीनता आंदोलन के अग्रदूत और बिहार विद्यापीठ के संस्थापक सदस्य चतुरानन दास के पुण्य स्मरण दिवस पर आज सदाकत आश्रम स्थित देशरत्न सभागार में एक गरिमामयी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए बिहार विद्यापीठ के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस अधिकारी श्री विजय प्रकाश ने सेनानियों के पारिवारिक परिवेश के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “चतुरानन दास जैसे कर्मठ और निस्वार्थ राष्ट्रभक्त आकस्मिक रूप से नहीं गढ़े जाते, बल्कि इसके पीछे उनके परिवार के सांस्कृतिक संस्कार और नैतिक मूल्य होते हैं। समाज और शोधकर्ताओं को इस बात का अध्ययन करना चाहिए कि उन परिवारों में ऐसी कौन-सी जीवन-शैली थी जिसने आजादी के ऐसे प्रखर पुरोधा तैयार किए।” उन्होंने आगे कहा कि किसान चेतना और शिक्षा के प्रसार में चतुरानन बाबू का योगदान आज भी हमारे लिए अनुकरणीय है।
कार्यक्रम का शुभारंभ चतुरानन दास जी के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं मौन श्रद्धांजलि के साथ हुआ। श्री श्यामानंद चौधरी (अपर सचिव, बिहार विद्यापीठ): अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्होंने विद्यापीठ के आरंभिक दिनों में चतुरानन बाबू के संस्थागत संघर्षों और उनकी संगठन-क्षमता पर विस्तार से बात की। श्री प्रकाश चन्द्र दास व श्री विकास चन्द्र दास (सुपुत्रद्वय): परिजनों की ओर से पिता के सामाजिक दायित्वों, सादगी और स्वाधीनता आंदोलन से जुड़े जीवंत संस्मरणों को साझा करते हुए भावुक श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. राणा अवधेश (सचिव, बिहार विद्यापीठ): उन्होंने कहा कि चतुरानन दास जी का पूरा जीवन जनसेवा और राष्ट्रोत्थान को समर्पित रहा, जिससे सीख लेकर नई पीढ़ी राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकती है। डॉ. मृदुला प्रकाश (निदेशक, शिक्षा-संस्कृति एवं संग्रहालय): उन्होंने चतुरानन दास जी की स्मृति को जीवंत रखने के लिए उनके सिद्धांतों को शिक्षा और समाज सुधार के व्यावहारिक कार्यों में उतारने का आह्वान किया।
24 अगस्त 1898 को जन्मे और 17 सितम्बर 1938 को महाप्रयाण करने वाले मिथिला विभूति चतुरानन दास बिहार के स्वाधीनता आंदोलन एवं किसान जागरण के मुख्य आधार-स्तंभों में गिने जाते हैं। गांधीवादी दर्शन और राष्ट्रीय शिक्षा के प्रसार हेतु स्थापित बिहार विद्यापीठ के विकास में उनका योगदान चिरस्मरणीय है।क्षसभा का कुशल संचालन सहायक प्राध्यापक श्री चन्द्रकांत आर्य ने किया, जबकि आगंतुकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त सचिव श्री अवधेश नारायण द्वारा किया गया। इस अवसर पर विद्यापीठ के शोधार्थी, शिक्षक एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।