बेताब अहमद
सासाराम। बिहार राज्य के रोहतास के छोटे से गांव अहरांव से निकलकर दुनिया के सबसे व्यस्त और आधुनिक देशों में शुमार जापान के क्रिकेट मैदान तक का सफर तय करना किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है। यह कहानी है 27 वर्षीय अभिषेक आनंद की, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर दिल में जुनून हो, तो इंजीनियरिंग की किताबें और विदेश की नौकरी भी आपके सपनों को रोक नहीं सकतीं। बचपन की गलियों में टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलने का जो शौक अभिषेक के दिल में था, वह बड़े होकर कमजोर नहीं हुआ, बल्कि समय के साथ और पक्का हो गया।
बिहार के रोहतास जिला के दिनारा प्रखंड के अहरांव गांव के बिशुन देव के पुत्र अभिषेक आनंद ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर पले-बढ़े अभिषेक के दिल में बचपन से ही क्रिकेट बसता था। गलियों में टेनिस और शॉर्ट-बॉल क्रिकेट खेलने वाले हर बच्चे की तरह उनका सपना भी बड़ा था। जिंदगी ने उन्हें आईआईटी (IIT) कानपुर तक पहुंचाया। उन्होंने रसायन विज्ञान और तकनीकी शिक्षा में महारत हासिल की। माँ-बाप की उम्मीदों के मुताबिक करियर भी चुना, लेकिन दिल का कोना आज भी मैदान की मांग कर रहा था।
कैंपस प्लेसमेंट के जरिए नौकरी उन्हें जापान ले गई। अजनबी देश, नई भाषा और कॉर्पोरेट की व्यस्तता लेकिन अभिषेक ने हार नहीं मानी। उन्होंने काम के बाद शाम और छुट्टियों के वक्त टोक्यो फाल्कन्स क्लब के लिए लेदर-बॉल क्रिकेट खेलना शुरू किया। क्लब के मैचों में उनका बल्ला बोला। चयनकर्ताओं की नजर उन पर पड़ी। देखते ही देखते, एक बिहारी लड़के ने जापान की राष्ट्रीय T20 टीम की जर्सी पहन ली।
अभिषेक साबित करते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों, तो आप चाहे दुनिया के किसी भी कोने में चले जाएं, आपकी ज़िद और मेहनत आपको आपकी मंजिल तक ले ही जाती है। अभिषेक का यह सफर सिर्फ एक नौकरी या खेल की कहानी नहीं है, यह इस बात की मिसाल है कि अगर आपके भीतर कुछ कर गुजरने की लगन हो, तो भूगोल और परिस्थितियां आपके सपनों को रोक नहीं सकतीं। आज जापान के लिए T20 इंटरनेशनल मैच खेल चुके अभिषेक रोहतास ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के युवाओं के लिए यह उम्मीद जगाते हैं कि कॅरियर की ऊंचाइयों को छूते हुए भी अपने पहले प्यार और सपनों को जिंदा रखा जा सकता है।