राइस मिल एसोसिएशन के वार्षिक अधिवेशन में मंत्री ने कहा- मिलिंग चार्ज की समस्या का जल्द होगा समाधान
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
पटना। खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के मंत्री डॉ. अशोक चौधरी ने कहा कि बिहार में अब राइस मिलरों से सिर्फ उसना चावल ही लिया जाएगा। राइस मिल एसोसिएशन की विभिन्न मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। किसान और राइस मिलरों की समस्याओं को देखते हुए वे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से चर्चा कर समाधान का प्रयास करेंगे।
मंत्री डॉ. अशोक चौधरी गुरुवार को होटल चाणक्य में आयोजित बिहार राज्य राइस मिल एसोसिएशन के वार्षिक अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बिहार में पीडीएस व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने में राइस मिलरों का महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है। सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।

उन्होंने कहा कि राइस मिलरों के मिलिंग चार्ज को सीधे उनके खातों में भेजने के मुद्दे पर जल्द ही मुख्यमंत्री से बातचीत की जाएगी। इस समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। मौके पर बिहार राज्य खाद्य आपूर्ति निगम के महाप्रबंधक ने भी मिलरों की समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि किसान और राइस मिलर एक-दूसरे पर निर्भर हैं तथा दोनों के बीच अन्योन्याश्रित संबंध है। सरकार राइस मिलरों की समस्याओं के प्रति गंभीर है और आपसी समन्वय से इनका जल्द समाधान निकाला जाएगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बिहार राज्य राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ राजू गुप्ता ने खाद्य आपूर्ति मंत्री के समक्ष मिलरों की विभिन्न मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि मिलिंग के बाद मिलिंग चार्ज सीधे मिलर के खाते में विभाग द्वारा भेजा जाए। विद्युत बिल में वर्ष 2011 की औद्योगिक नीति के अनुसार अनुदान देकर फिक्स चार्ज समाप्त किया जाए।
उन्होंने उपभोक्ताओं के हित को ध्यान में रखते हुए सरकार के नीतिगत निर्देश के अनुसार स्थापित उसना मिलों से ही शत-प्रतिशत उसना चावल की मिलिंग कराने की मांग की। साथ ही बिहार के किसानों से कम से कम 60 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद सुनिश्चित करने की बात कही।
एसोसिएशन ने किसानों के उत्पादित धान का शत-प्रतिशत क्रय सुनिश्चित करने के लिए पैक्स के अलावा एफपीओ, बिस्कोमान, नाफेड, एनसीसीएफ और राइस मिलरों के माध्यम से भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद कराने की मांग रखी। उसना मिलों को अन्य राज्यों की तर्ज पर प्रति 100 क्विंटल मिलिंग चार्ज पर प्रोत्साहन राशि देने, राइस उद्योग को कृषि उद्योग का दर्जा देने तथा धान खरीद की प्रक्रिया पूरी होने तक कालाबाजारी के लिए बिहार से बाहर जाने वाले धान पर रोक लगाने की मांग भी की गई।
इसके अलावा बंद अथवा बीमार राइस मिलों को आर्थिक पुनर्वास नीति के तहत सहायता देकर पुनः संचालित करने, सरप्लस जिलों में धान खरीद का आवंटन बढ़ाने सहित अन्य मांगें भी रखी गईं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म सप्ताह के तहत राइस मिल एसोसिएशन के 10 सदस्यों ने मां वैष्णो देवी सेवा समिति ब्लड बैंक के सौजन्य से रक्तदान किया। इस अवसर पर एसोसिएशन के महासचिव आनंद सिंह, पप्पू सिंह, शशि झा, मुन्ना सिंह, सरदार जगजीवन सिंह सहित कई लोगों ने अपने विचार रखे।