शिक्षकों को आधुनिक तकनीक एवं नई शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने पर जोर, जिला एवं सत्र न्यायाधीश और डीडीसी ने किया संबोधित
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। सच्चिदानंद सिन्हा महाविद्यालय, औरंगाबाद में आयोजित छह दिवसीय राष्ट्रीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का शनिवार को गरिमामय वातावरण में समापन हुआ। यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी), गया के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘विकसित भारत के लिए शिक्षकों का सशक्तिकरण: एआई, भारतीय ज्ञान प्रणाली और समावेशी शिक्षणशास्त्र का एकीकरण’ था। छह दिनों तक चले इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों ने आधुनिक शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भारतीय ज्ञान परंपरा और समावेशी शिक्षण पद्धतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम के अंतिम दिन तीन महत्वपूर्ण अकादमिक सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र में उत्तर-पूर्व क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, शिलांग के प्रो. (डॉ.) बाला आर. डक्कर ने ‘इन्क्लूसिव एजुकेशन इन एनईपी-2020’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत समान शैक्षिक अवसर, विविधता के सम्मान और सभी विद्यार्थियों के लिए समावेशी शैक्षणिक वातावरण विकसित करने पर जोर दिया। सत्र का संचालन डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने किया। मोहम्मद मसउद आलम ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा नीरज कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
द्वितीय सत्र में जीपी कॉलेज, औरंगाबाद के प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार सिंह ने ‘द स्मार्ट टीचर इन द एआई एरा’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से बदलते दौर में शिक्षकों को तकनीकी दक्षता, नवाचार और आधुनिक शिक्षण विधियों को अपनाना होगा। इससे शिक्षा को अधिक प्रभावी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाया जा सकता है। सत्र का संचालन एवं प्रतिवेदन श्रीमती सृष्टि तिवारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजीव रंजन ने किया।
तृतीय सत्र में एससीईआरटी, दिल्ली के सहायक प्राध्यापक डॉ. ओमप्रकाश ने ‘क्रिटिकल पेडागॉजी’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शिक्षा में आलोचनात्मक चिंतन, तार्किक विश्लेषण, संवाद और सामाजिक चेतना के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उनमें स्वतंत्र चिंतन और समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करना भी है। सत्र का संचालन कौशल कुमार किशोर ने किया। संतोष कुमार तिवारी ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा डॉ. छोटेलाल यादव ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
इसके बाद आयोजित वैलिडिक्टरी एवं समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में जिला एवं सत्र न्यायाधीश-I (मानवाधिकार), औरंगाबाद विश विभूति गुप्ता तथा उप विकास आयुक्त कुमारी अनुपम सिंह उपस्थित रहीं। अतिथियों ने अपने संबोधन में शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का निरंतर प्रशिक्षण ही शिक्षा व्यवस्था को समयानुकूल और गुणवत्तापूर्ण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समारोह का संचालन एफडीपी के उप-समन्वयक डॉ. मोहम्मद राशिद ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन समन्वयक डॉ. संतोष सुमन ने किया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) सुधीर कुमार मिश्रा ने कहा कि छह दिवसीय एफडीपी शिक्षकों को भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और समावेशी शिक्षा के विभिन्न आयामों से जोड़ने का सार्थक प्रयास रहा। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान एवं अनुभव को व्यवहार में शिक्षण कार्य का हिस्सा बनाना ही इस कार्यक्रम की वास्तविक उपलब्धि होगी।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान एवं अनुभव को उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, शैक्षणिक नवाचार और विकसित भारत के निर्माण में उपयोग करने का संकल्प लिया।