बंद खदानों से फिर गूंजेगी चहल-पहल: रोहतास में पत्थर खनन शुरू होने से युवाओं को मिलेगा रोजगार
बेताब अहमद
सासाराम। रोहतास जिले वासियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। जिला प्रशासन के ठोस प्रयासों से रोहतास जिले में लगभग डेढ़ दशक से बंद पड़े पत्थर खनन की राह की बाधाएं अब लगभग समाप्त हो चुकी हैं। वर्ष 2012 से बंद पड़े पत्थर खनन को एक बार फिर से शुरू करने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा के नेतृत्व में भेजे गए विस्तृत प्रतिवेदन पर मुहर लगाते हुए सरकार ने चार खनन ब्लॉकों को स्वीकृति प्रदान की है। इसी क्रम में पटना से खनन विभाग की एक विशेष टीम ने करवंदिया और गिजवाही-2 पहाड़ी क्षेत्रों का दौरा कर वहां पहुँचने के रास्तों और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। इससे पहले गायघाट और गिजवाही-1 ब्लॉक के लिए निविदा (टेंडर) प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है, जिसकी अंतिम तिथि 21 नवंबर निर्धारित है। प्रशासन का कहना है कि सभी नियम और पर्यावरणीय गाइडलाइन का पालन करते हुए ही खनन कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।प्रशासन की इस पहल से न केवल ठप पड़े पत्थर व्यवसाय को नई गति मिलेगी, बल्कि हज़ारों स्थानीय युवाओं और मजदूरों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
साल 2012 से रोहतास में पत्थर खनन बंद होने से जो आर्थिक मंदी छाई हुई थी, उसके अब खत्म होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। डीएम दीपक कुमार मिश्रा की सक्रियता के चलते करवंदिया और गिजवाही के पहाड़ी इलाकों में खनन की बाधाएं दूर कर ली गई हैं। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद खनन विभाग के अधिकारी खुद मौके पर पहुँचकर तैयारियों का जायजा ले रहे हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि खनन शुरू होने से पलायन रुकेगा और क्षेत्र के मजदूरों तथा व्यवसायियों के घरों में फिर से खुशहाली लौटेगी।

प्रशासन की सख्ती से अवैध धंधे पर संकट: कानूनी टेंडर होने से हाथ से निकल जाएगा करोड़ों का खेल
साल 2012 से जो मजे चल रहे थे, जब खनन बंद था और पत्थर माफिया चोरी-छिपे अपने हिसाब से पहाड़ियों को काटकर माल निकाल रहे थे, अब उस पर पानी फिर गया है। जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने पूरा खेल ही बिगाड़ दिया है। करवंदिया में जिस रास्ते को बंद रखकर पत्थर माफिया अपना एकाधिकार चला रहे थे, डीएम ने उस अड़चन को भी दूर कर दिया। अब पटना से खनन विभाग के बड़े अफसर खुद आकर जमीनी मुआयना कर रहे हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि अब वहां सरकारी ठेकेदार बैठेंगे, चौकियां बनेंगी और हर गाड़ी का हिसाब रखा जाएगा। पत्थर माफिया लोगों का मानना है कि अगर करवंदिया और गिजवाही-2 में भी छोटे-छोटे कानूनी ब्लॉक अलॉट हो गए, तो हमारा पूरा सिंडिकेट ध्वस्त हो जाएगा। सरकार कह रही है कि इससे जनता को रोजगार मिलेगा, लेकिन हमारे लिए तो यह करोड़ों की काली कमाई के रास्ते बंद होने जैसा है। अब बिना परमिट के रात के अंधेरे में गाड़ियां निकालना नामुमकिन हो जाएगा। प्रशासन की इस अंतिम चरण की कार्रवाई ने हमारे पूरे नेटवर्क की नींद उड़ा दी है।