नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
भागलपुर। बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने कहा कि कृषि के माध्यम से विकसित भारत का निर्माण संभव है और इसके लिए छात्र-छात्राओं को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि कृषि केवल देश की अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन से जुड़ा विषय है।
शुक्रवार को सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय के नौवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय का परिसर पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है और अन्य संस्थानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यहां कृषि क्षेत्र से जुड़े छात्र और वैज्ञानिक देश की खाद्य सुरक्षा के संरक्षक हैं, जो भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने चीन के विकास मॉडल और देंग शियाओपिंग के चार आधुनिकीकरण कृषि, तकनीकी शिक्षा, उद्योग एवं सशस्त्र बल का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत को भी तकनीक, जलवायु परिवर्तन और कृषि अनुसंधान पर विशेष ध्यान देना होगा।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि बीएयू को ग्रीन कैंपस और प्लास्टिक फ्री कैंपस के रूप में विकसित करने के प्रयास अत्यंत सराहनीय हैं। विश्वविद्यालय के मीडिया सेंटर द्वारा निर्मित शैक्षणिक फिल्में ज्ञान के प्रभावी प्रसार का माध्यम हैं, जो किसानों और छात्रों को नई तकनीकों से जोड़ने में सहायक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी उपयोगी फिल्में अब लोक भवन के माध्यम से भी विश्वविद्यालय के सहयोग से तैयार की जाएंगी।
मखाना क्षेत्र में विश्वविद्यालय के योगदान की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय में “मखाना उत्कृष्टता केंद्र” की स्थापना अत्यंत आवश्यक और समयानुकूल पहल है। इस दिशा में उन्होंने अपनी सहमति प्रदान करते हुए आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया, जिससे बिहार में मखाना अनुसंधान, उत्पादन और प्रसंस्करण को नई दिशा मिल सके।
उन्होंने सामाजिक संदेश देते हुए परिसर को प्लास्टिक मुक्त बनाने, “प्लास्टिक मुक्त बिहार” अभियान को आगे बढ़ाने, पानी की बोतलों के उचित निपटान, नशा मुक्ति तथा टीबी उन्मूलन के लिए जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया।
भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के वर्षों के कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का उत्सव है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के विकास में करने की अपील की।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, चल रही परियोजनाओं तथा भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय “वर्क इज वर्शिप” एवं “वर्क विद स्माइल” के सिद्धांत पर निरंतर प्रगति कर रहा है।
उन्होंने “सबौर मखाना-1”, मखाना हार्वेस्टर, विभिन्न फसलों की नई किस्मों के विकास, स्टार्टअप्स, पेटेंट, कॉपीराइट तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाओं की उपलब्धियों का उल्लेख किया। विश्वविद्यालय को NAAC A-grade प्राप्त है, जो इसकी शैक्षणिक उत्कृष्टता और अनुसंधान गुणवत्ता का प्रमाण है। साथ ही आईसीएआर से उच्च मान्यता तथा नीति आयोग द्वारा नोडल एजेंसी के रूप में मान्यता भी मिली है।
समारोह को डॉ. विवेकानंद सिंह सहित कई गणमान्य लोगों ने संबोधित किया। इससे पूर्व कुलाधिपति के आगमन पर प्रभारी जिला पदाधिकारी प्रदीप कुमार सिंह, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव तथा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.बी. सिंह ने उनका स्वागत किया।