नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
कटोरिया, बांका। मां -बाप खून पसीने की कमाई से एक-एक पाई जोड़कर बच्चों की अच्छी परवरिश करते है। पढ़ाई लिखाई से लेकर उनकी तमाम जरूरतों और शोक को पूरा करने के लिए अपनी पूरी जवानी झोंक देते है। जिस मां ने अपनी कोख में नौ महीने रखकर बच्चे की जन्म देकर उंगली पकड़कर जमीन पर चलना सिखाया और अपना पूरा जीवन बेटे के सुख के लिए समर्पित कर दिया। ताकि बच्चो का मुस्तकबिल आज से बेहतर हो, इसके लिए हर जतन करते है। लेकिन वही बेटा बुढ़ापे में भीख मांगने के लिए छोड़ दे तो लोग किस पर विश्वास करें।
ऐसा ही एक मामला बांका जिला के कटोरिया प्रखंड के नवाडीह गांव निवासी मालती देवी व उसके पति गोविन्द ठाकुर की है। जो करीब पच्चीस साल से भीख मांगकर गुजर बसर कर रहे है। वृद्ध मालती देवी ने बताया कि मेरा एक बेटा और छ: बेटी है। बावजूद हमको कोई नही देखता है। बेटी कहती है कि जब तुम्हारा बेटा नही देखती है तो हमलोग कहां से देखेगें। बेटा संजय ठाकुर पच्चीस वर्ष से ही अपने ससुराल में रह रहे है।ना ही हमें देखभाल करते है ना ही कोई खर्च देते है। हम और मेरा पति पच्चीस वर्षों से घर में अकले रहकर भीख मांग कर गुजर बसर कर रहे हैं।
मालती देवी ने कहा कि कई बार पंचायत भी बैठाया हर बार कहता था यही रहेगें और तुमलोगों की देखभाल भी करेगें। चार महिने पहले संजय ठाकुर के पिता गोविन्द ठाकुर की मौत हो गयी। बेटा ना तो देखने आया ना ही श्राद्ध कर्म में सामिल हुआ।
मेरा बेटा संजय ठाकुर ने मुझे बिना बताये अबैध तरीके से जमीन बैच दिया। मुझे अब घर से बेदखल करना जा रहा है। किसी तरह भीख मांगकर जीवन गुजार रही हूं। अब कहां जाए भीख मांगने के दौरान रोते विलकते बुर्जग महिलाओं को देख कर किसी सज्जन व्यकित नें अंचल कार्यालय कटोरिया ले आया जहां प्रखंड पीएलभी राजेश चौधरी से मिली, जहां रोते बिलखते मालती देवी को देखकर अपना आंसु नही रोक पाए और कहां कि आवेदन लिखकर प्रखंड विकास पदाधिकारी देवाशीष कुमार व कटोरिया थाना में आवेदन दिलवाकर न्याय दिलवाने का काम करेगें।