नवबिहार टाइम्स संवाददाता
दाउदनगर (औरंगाबाद)। मौलाबाग निवासी सत्येंद्र जायसवाल को हार्ट अटैक के बाद अनुमंडल अस्पताल जब लोग लेकर गए तो वहां चिकित्सक उपलब्ध नहीं मिले। इस पर लोगों ने गुस्सा जाहिर करते हुए हंगामा किया। हालांकि बाद में आयी महिला चिकित्सा पदाधिकारी ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बीमा अभिकर्ता सत्येंद्र जायसवाल को गुरुवार की सुबह हार्ट अटैक होने के बाद दो निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी स्थिति को गंभीर बताते हुए अनुमंडल अस्पताल जाने की सलाह दी गई। जब लोग अनुमंडल अस्पताल पहुंचे तो वहां चिकित्सक नदारद थे। लोगों ने इसे लेकर गुस्सा जाहिर किया।
राणा प्रताप सिंह ने कहा कि अस्पताल में चिकित्सकों की लापरवाही से आम लोग काफी परेशान हैं। अस्पताल पहुंचने के बाद जब चिकित्सक ही नहीं मिलेंगे तो जान कैसे बचेगी। इंजीनियर मनीष कुमार ने कहा कि नियमत: नौ बजे चिकित्सकों की उपस्थिति अनिवार्य है, इसके बावजूद मरीज को लेकर आने पर कोई चिकित्सक यहां नहीं मिला।
इस संबंध में स्वास्थ्य प्रबंधक ठाकुर चंदन सिंह ने कहा कि जब मरीज आए तब यहां डॉक्टर नहीं थे, यह बात सही है। रात्रि सेवा देने वाले चिकित्सक डॉक्टर रवि रिसव के जाने के तुरंत बाद मरीज आये। तुरंत ही डॉक्टर एन प्रिया को कॉल किया गया और वह शीघ्र ही अस्पताल पहुंच गई। इसके बाद बीमार को मृत घोषित किया गया। लोगों का कहना है कि अनुमंडल अस्पताल में लगातार लापरवाही देखी जा रही है।
किसी भी तरह की घटना दुर्घटना के बाद समय पर वहां चिकित्सक उपलब्ध नहीं मिलते। जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में नंद किशोर यादव, शम्भू शरण सिंह, प्रशांत इन्द्रगुरु व अन्य उपस्थित रहे।