मोदी के सुदीर्श अनुभव, दूरदर्शी सोच एवं निर्णय क्षमता से बढ़ी ताकत
13वें वर्ष में नये लक्ष्यों और नई रणनीतियों के साथ आगे बढ़ने की तैयारी
नयी दिल्ली से लौटकर कमल किशोर

हाल ही में मुझे नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण मीडिया संवाद कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। देश भर से चुनिदा संपादकों को इस संवाद में आमंत्रित किया गया था। बिहार के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में मुझे भी इस महत्वपूर्ण आयोजन में शामिल होने का अवसर मिला। कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार के अनेक शीर्ष नेता उपस्थित थे।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रेल तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल, राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी, सह प्रमुख संजय मयूख सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने सरकार की उपलब्धियों, भावी योजनाओं और देश के विकास के रोडमैप पर विस्तार से विस्तार से कार्यक्रम तथा डीनर में शामिल हुए नेताओं ने पिछले 12 वर्षों के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में हुए कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार भारत ने आर्थिक, सामरिक, तकनीकी और वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को मजबूत किया है।
इस संवाद कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान मेरे मन में एक बात बार-बार उभरकर सामने आती रही कि भारतीय जनता पार्टी आज एक नए आत्मविश्वास और नई ऊर्ज़ा के साथ आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। संगठन से लेकर सरकार तक एक नई सक्रियता और सकारात्मकता स्पष्ट रूप से महसूस की जा सकती है। यह केवल भाषणों या प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं था बल्कि नेताओं, कार्यकर्ताओं और संगठन के विभिन्न स्तरों पर दिखाई देने वाली कार्यशैली में भी इसका स्पष्ट प्रतिबिब नजर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व ने पिछले एक दशक से अधिक समय में भाजपा को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में स्थापित किया है।
उनके सुदीर्घ राजनीतिक अनुभव, दूरदर्शी सोच और निर्णय क्षमता ने पार्टी को एक स्थिर दिशा प्रदान की है। संवाद कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट महसूस हुआ कि भाजपा आज भी मोदी के नेतृत्व को अपनी सबसे बड़ी ताकत के रूप में देखती है। देश और दुनिया के बदलते परिदृश्य में प्रधानमंत्री मोदी का अनुभव पार्टी को निरंतर मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है। इसके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में संगठन के भीतर एक नई ताजगी और उत्साह भी दिखाई देता है। अपेक्षाकृत युवा नेतृत्व होने के कारण उनके कामकाज में ऊर्ज़ा, नवीन सोच और संगठनात्मक सक्रियता का विशेष प्रभाव दिखाई देता है।
पार्टी के अनेक पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच भी इस नए नेतृत्व को लेकर सकारात्मक चर्चा सुनने को मिली। ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा अब अनुभव और युवा ऊर्ज़ा के संतुलन के साथ आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रही है। इस दौरान एक और महत्वपूर्ण बात महसूस हुई। हाल के वर्षों में अनेक राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करने के बावजूद भाजपा के भीतर आत्मविश्वास का स्तर काफी मजबूत दिखाई देता है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बढ़ते प्रभाव, विभिन्न राज्यों में संगठन के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न चुनौतियों, विशेषकर खाड़ी क्षेत्र से जुड़े संकटों का सफलतापूर्वक सामना करने के बाद पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं में एक विशेष प्रकार का भरोसा दिखाई देता है।
उन्हें विश्वास है कि कठिन परिस्थितियों में भी सरकार और संगठन प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं। मीडिया संवाद के दौरान नेताओं के वक्तव्य, प्रस्तुत आंकड़ों और भविष्य की योजनाओं को सुनने के बाद मैंने यह आकलन किया कि भाजपा अब अपने 13वें वर्ष में प्रवेश करते हुए केवल उपलब्धियों का उल्लेख करने तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि वह आने वाले वर्षों के लिए नए लक्ष्यों और नई रणनीतियों के साथ आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। पार्टी के भीतर यह भावना स्पष्ट दिखाई देती है कि देश की अपेक्षाएं बढ़ी हैं और उन अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही उसकी सबसे बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी है।
नई दिल्ली से लौटते समय मेरे मन में यही निष्कर्ष था कि भारतीय जनता पार्टी आज अनुभव और युवा नेतृत्व के एक महत्वपूर्ण संगम के दौर से गुजर रही है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यापक अनुभव और नेतृत्व क्षमता है, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में संगठन में नई ऊर्ज़ा और नई सोच दिखाई दे रही है। यदि यह समन्वय इसी प्रकार बना रहता है, तो भाजपा अपने 13वें वर्ष में नए तेवर, नए उत्साह और नए आत्मविश्वास के साथ राष्ट्र सेवा के लक्ष्य को आगे बढ़ाने का प्रयास करती दिखाई देगी।