नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
नालंदा। नालंदा के शेरपुर गांव में एक ऐसा वाकया सामने आया जिसने साबित कर दिया कि सच्चा प्यार और जीवनसाथी के प्रति समर्पण क्या होता है। यहाँ एक पल की अनहोनी ने एक हंसते-खेलते परिवार को हमेशा के लिए खामोश कर दिया, लेकिन पीछे छोड़ गया प्रेम की एक ऐसी मिसाल जो सदियों तक याद रखी जाएगी। शेरपुर गांव निवासी 50 वर्षीय धनकेश्वर मांझी आंखों से देख नहीं सकते थे (दृष्टिहीन थे)। रविवार का दिन था और घर में एक शोक/श्राद्धकर्म का कार्यक्रम था। सभी कामों से निवृत्त होकर धनकेश्वर अपनी धर्मपत्नी 45 वर्षीय बालेश्वरी देवी के साथ गाँव के ही एक पोखर पर कपड़े धोने गए थे।
कपड़े धोने के दौरान अचानक धनकेश्वर का संतुलन बिगड़ा और वे गहरे पानी में जा समाए। वे खुद को संभाल नहीं पा रहे थे और डूबने लगे। किनारे पर मौजूद बालेश्वरी देवी ने जब अपने दृष्टिहीन पति को मौत के मुंह में जाते देखा, तो उन्होंने एक पल के लिए भी अपनी जान की परवाह नहीं की। बिना यह सोचे कि गहरे पानी में जाने का अंजाम क्या होगा, उस अर्धांगिनी ने अपने सुहाग को बचाने के लिए पोखर की अगाध गहराइयों में छलांग लगा दी।
बालेश्वरी ने अपने पति को बचाने की पूरी कोशिश की, उन्हें पकड़ने और उबारने का संघर्ष किया। लेकिन पानी का बहाव और गहराई इतनी अधिक थी कि दोनों उस दलदलनुमा गहरे पानी में खींचते चले गए। देखते ही देखते दोनों की सांसें हमेशा के लिए थम गईं। जब काफी देर तक वे घर नहीं लौटे, तो परिवार के दिलों में बेचैनी बढ़ी। खोजबीन शुरू हुई और जब सच्चाई सामने आई, तो पूरा गाँव सन्न रह गया।
यह दुर्घटना मात्र दो लोगों के डूबने की खबर नहीं है, बल्कि यह बयां करती है कि एक पत्नी का अपने पति के प्रति प्यार और कर्तव्य किस हद तक अटूट हो सकता है। आज शेरपुर गाँव का हर शख्स इस दंपती के असमय जाने पर रो रहा है और बालेश्वरी के उस साहस को नमन कर रहा है, जिन्होंने पति के बिना जीना मंजूर नहीं किया। प्यार और समर्पण की इससे बड़ी मिसाल क्या होगी।