बिहार का है जम्मू-कश्मीर के CISF कैंप में फायरिंग का आरोपी, 4 जवानों को गोलियों से भूना
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
जम्मू कश्मीर/पटना। देश की रक्षा और सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले सुरक्षा बलों के भीतर से अक्सर ऐसी डरावनी और झकझोर देने वाली खबरें सामने आती हैं, जो सिर्फ एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं होतीं। कठुआ जिले के बसोहली स्थित सीआईएसएफ कैंप में हुआ हालिया खूनी संघर्ष इसी कड़वी सच्चाई का एक और उदाहरण है, जहां मामूली घरेलू कलह और ड्यूटी के दबाव ने एक हंसते-खेलते कैंप को श्मशान में बदल दिया। बसोहली के पास स्थित SEWA-2 पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) कैंप में मंगलवार शाम हुआ गोलीकांड सुरक्षा बलों के भीतर मानसिक तनाव और व्यक्तिगत व पेशेवर जीवन के बीच संतुलन की गंभीर चुनौती को उजागर करता है। यह सवाल उठाना कि कार्यस्थल पर ड्यूटी और परिवार के बीच तालमेल के लिए क्या बेहतर नियम या संवाद प्रक्रिया होनी चाहिए थी, ताकि विवाद खूनी संघर्ष में न बदले।

क्या थी विवाद की पृष्ठभूमि?
प्राथमिक जांच और पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी कांस्टेबल अवधेश कुमार सिंह और उनकी पत्नी पूजा देवी (जो खुद CISF में लेडी हेड कांस्टेबल हैं) एक ही प्रोजेक्ट साइट पर तैनात थे। दोनों की अलग-अलग शिफ्ट में ड्यूटी होने के कारण बच्चे की देखरेख और उसके आवागमन को लेकर कुछ प्रशासनिक व व्यावहारिक दिक्कतें थीं। बताया जा रहा है कि यूनिट के नियमों के तहत बच्चे के साथ क्वार्टर गार्ड क्षेत्र में प्रवेश या ठहराव को लेकर कुछ पाबंदियां थीं, जिससे उपजे तनाव और बहस ने आवेश का रूप ले लिया।
घटनाक्रम
मंगलवार शाम करीब 7:30 बजे ड्यूटी परिवर्तन के दौरान इसी विषय को लेकर उपजे गतिरोध के बाद बात इतनी बढ़ गई कि आरोपी ने कथित तौर पर अपनी सर्विस राइफल (AK-47) से अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस अचानक हुए हमले में असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल रफीक अहमद और कांस्टेबल संदीप कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई।घटना के तुरंत बाद कठुआ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी जवान अवधेश कुमार सिंह को हिरासत में ले लिया। सुरक्षा बल और पुलिस यह जांच कर रहे हैं कि किन परिस्थितियों ने एक मामूली पारिवारिक व प्रशासनिक असहजता को इस विदारक अपराध तक पहुँचा दिया। इस घटना ने सुरक्षा कर्मियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन की काउंसलिंग पर नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
घटना की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों के मुताबिक
बहस इस बात पर शुरू हुई थी कि यह जोड़ा अक्सर अपने छोटे बच्चे को काम की जगह पर ले आता था। जांच अधिकारी ने कहा कि यह पति-पत्नी एक ही साइट पर अलग-अलग शिफ्ट में काम करते थे। जब एक साथी ड्यूटी पर आता था, तो वह बच्चे को साथ लाता था ताकि उसे घर लौट रहे दूसरे साथी को सौंप सके। दोनों को बच्चे को प्रोजेक्ट साइट पर न लाने के लिए कहा गया था।विवाद पत्नी पूजा और उसके बच्चे को क्वार्टर गार्ड में आने को लेकर शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि जब अभिदेश कुमार सिंह ड्यूटी पर होते थे, उस दौरान लेडी हेड कॉन्स्टेबल पूजा देवी अपने बच्चे के साथ क्वार्टर गार्ड में आती थीं। यूनिट प्रशासन ने उन्हें बच्चे के साथ क्वार्टर गार्ड में आने या वहां रुकने की इजाजत नहीं दी थी। इसी को लेकर आरोपी जवान की संबंधित कर्मियों से कहासुनी हो गई। इसी बात पर कांन्स्टेबल हेडक्वार्टर ऑफिसर मेस सेक्शन पहुंचा, जहां चार जवान पहले से मौजूद थे।आरोपी ने सरकारी AK-47 राइफल से अंधाधुंध फायरिंग की। अन्य जवानों ने अभिदेश को काबू कर पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपी 2009 बैच का है। उसके खिलाफ CISF हेडक्वॉर्टर ने मामले की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए हैं। जिले के पहाड़ी इलाके बसोहली के हट्ट मस्का क्षेत्र में स्थित सेवा-II हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के CISF कैंप में हुई। पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में CISF कर्मियों की तैनाती है। घटना की सूचना मिलते ही बसोहली पुलिस की टीम मौके पर पहुंची।
आरोपी हेड कॉन्स्टेबल से पूछताछ
फिलहाल आरोपी हेड कॉन्स्टेबल से पूछताछ की जा रही है। बसोहली के पावर प्रोजेक्ट रावी नदी पर बना है। इसे 1993 में शुरू किया गया था। 2013 की बाढ़ में इसका 300 मीटर लंबा हिस्सा बह गया था। तब से ये पूरी तरह बंद है। सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में ऐसी घटनाओं होने की वजह व्यक्तिगत व घरेलू समस्याएं, पारिवारिक विवाद, डिप्रेशन, काम से जुड़ी परेशानियां और छोटी-छोटी बातों पर आपा खो देना बताया है। सरकार ने संसद में बताया कि पिछले 15 साल में ऐसी घटनाओं में 24 से ज्यादा जवान मारे गए।