नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
धनबाद। झारखंड राज्य के धनबाद का कतरास इलाका एक बार फिर अवैध खनन और असुरक्षित बंद पड़ी खदानों की वजह से दहल उठा है। धनबाद के रामकनाली से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है, जहाँ सिर्फ चंद किलो कोयला चुनकर अपने परिवार का पेट पालने निकलीं दो महिलाओं की जिंदगी मलबे के नीचे दफन हो गई। रविवार को कतरास के रामकनाली ओपी क्षेत्र स्थित बंद परियोजना के पास अचानक हुए भू-धंसान ने कई परिवारों को जिंदगी भर का घाव दे दिया।

इस हादसे में राजबाड़ी केवट टोला की रहने वाली 40 वर्षीय मूंगिया देवी और झींझीपहाड़ी की एक अन्य महिला की मौके पर ही मौत हो गई। मलबे की चपेट में आई घायल सीमा देवी (32) ने रोते हुए बताया कि वे सब रोज़ की तरह कोयला चुन रहे थे, तभी अचानक मौत बनकर ऊपर से भारी मलबा गिर पड़ा। अपनों को खोने और घायलों के चीख-पुकार से पूरे इलाके में मातम पसरा है, जबकि कुछ और लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका ने स्थानीय लोगों के दिलों को दहला दिया है।
बट्टू बाबू बंगला और आसपास का इलाका पहले भी भू-धंसान की घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे क्षेत्रों में जमीन के नीचे पुराने खनन क्षेत्र होने के कारण सतह की स्थिरता प्रभावित होने का खतरा रहता है। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं। पुराने या भूमिगत खनन क्षेत्रों में जमीन के नीचे खाली स्थान होने की आशंका रहती है। ऊपर की सतह सामान्य दिखाई देने के बावजूद अचानक धंस सकती है। ऐसे में लोगों के लिए पुराने खनन क्षेत्रों, गोफ और दरार वाले स्थानों पर जाना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर कोयला चुनने के लिए असुरक्षित स्थानों पर जाने से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।

यह हादसा प्रशासन और प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बंद पड़ी परियोजनाओं के आसपास सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, जिसके कारण स्थानीय लोग जान जोखिम में डालकर वहाँ जाते हैं। हादसे के बाद मलबे में और भी लोगों के दबे होने की आशंका है, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत कार्य से ज्यादा अफरातफरी का माहौल दिख रहा है। मृतक महिलाओं के शवों को आनन-फानन में ले जाना और घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज होना यह साफ दर्शाता है कि मामले को दबाने की कोशिशें भी शुरू हो चुकी हैं। क्या प्रशासन इस लापरवाही पर कोई सख्त कदम उठाएगा?