कृषि विज्ञान केंद्र आमस में जिला स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला आयोजित, 2410 किसान कर रहे जैविक एवं प्राकृतिक खेती
नवबिहार टाइम्स संवाददाता
आमस (गया)। कृषि विज्ञान केंद्र, आमस में शुक्रवार को “खेत बचाओ अभियान” के तहत जिला स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन औरंगाबाद के पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुशील सिंह ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर बढ़ती निर्भरता को कम करना समय की आवश्यकता है। प्राकृतिक खेती इस दिशा में एक प्रभावी पहल है, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति सुरक्षित रहेगी और किसानों की लागत भी कम होगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे कम से कम अपनी खेती के 20 से 25 प्रतिशत हिस्से में प्राकृतिक खेती अपनाएं, ताकि घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न का उत्पादन हो सके।
उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। बिहार के किसानों को इससे सीख लेते हुए टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देना चाहिए।
कार्यशाला में बताया गया कि जिले में जैविक खेती प्रोत्साहन कार्यक्रम, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन और परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत कुल 40 क्लस्टरों में 2410 किसान लगभग 1250 हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक एवं प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत बांके बाजार, बोधगया, टनकुप्पा, फतेहपुर और टिकारी प्रखंडों के 25 क्लस्टरों में 535 किसान 500 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती कर रहे हैं। किसानों को प्रशिक्षण, जागरूकता, जैविक प्रमाणीकरण, पैकेजिंग और जैविक उत्पादों के विपणन के लिए सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
कार्यक्रम में किसानों को वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग और उसके लाभों की जानकारी दी गई। बताया गया कि पक्का वर्मी कम्पोस्ट इकाई निर्माण पर लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 5000 रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। वर्ष 2024 में 91 किसानों द्वारा 262 इकाइयों तथा वर्ष 2025 में 162 किसानों द्वारा 472 वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों का निर्माण किया गया है।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत जिले के 15 प्रखंडों में एक-एक क्लस्टर का चयन कर 1875 किसानों को प्रशिक्षित किया गया है। इन किसानों द्वारा 750 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है। किसानों को बीजामृत, जीवामृत, घन-जीवामृत, नीमास्त्र, दशपर्णी, मल्चिंग, बहुफसली खेती और पारंपरिक बीजों के उपयोग की जानकारी दी गई है।
इसके अलावा किसानों को प्राकृतिक खेती से जुड़े उपकरण, ड्रम, स्टोरेज कंटेनर तथा अन्य संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं। चयनित क्लस्टरों में जैविक आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिले में 10 जैव उपादान संसाधन केंद्र (बीआरसी) स्थापित किए गए हैं।
कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी, गया, कृषि विज्ञान केंद्र आमस के वरीय वैज्ञानिक, उप निदेशक (रसायन), आत्मा के पदाधिकारी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, किसान मोर्चा अध्यक्ष धनंजय शर्मा, भाजपा नेता निरंजन सिंह, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
कार्यशाला में प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देकर मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने, खेती की लागत कम करने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।