नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
मसौढ़ी, पटना। अंतरराष्ट्रीय पुनपुन पितृपक्ष मेले में जिला प्रशासन की तैयारियों की पहली बारिश में ही पोल खुल गई। शनिवार को हुई बारिश के बाद पिंडदान के लिए बनाया गया मुख्य पंडाल पूरी तरह पानी-पानी हो गया। पंडाल में पानी आ जाने से पिंडदानियों को खड़े-खड़े ही पिंडदान और तर्पण करना पड़ा। प्रशासन ने मेला शुरू होने से पहले पिंडदानियों को हर सुविधा देने का वादा किया था, लेकिन बारिश होते ही वादे धरे रह गए।
बेगूसराय से आए पिंडदानी सुभाष प्रसाद ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बारिश में छिपने और बैठने की कोई व्यवस्था नहीं थी। हम लोग खड़े-खड़े ही विधिवत तर्पण करने को विवश हुए। पिंड को नदी में प्रवाहित भी नहीं कर सके। लखीसराय से आई महिला पिंडदानियों ने भी व्यवस्था पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि जब प्रशासन को पता था कि यह बरसात का समय है, तो पंडाल में वाटरप्रूफिंग की मुकम्मल व्यवस्था होनी चाहिए थी। सिर्फ उद्घाटन करके अधिकारी चले गए, जमीनी हकीकत कोई देखने वाला नहीं है। पूरा पंडाल परिसर जलजमाव में तब्दील हो गया। इधर-उधर पानी भरा होने से बैठकर पूजा-अर्चना करना मुश्किल हो गया। महिला पिंडदानियों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
पुनपुन पंडा समिति के सचिव रिंकू पांडे ने भी प्रशासन पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से आने वाले पिंडदानी क्या संदेश लेकर जाएंगे कि बिहार में यही व्यवस्था होती है। न बैठने की जगह है, न बारिश से बचने की। उन्होंने मांग की है कि आने वाले दिनों में पंडाल की व्यवस्था तुरंत सुदृढ़ की जाए ताकि पिंडदानी शांतिपूर्ण ढंग से बैठकर विधिवत पूजा कर सकें।