मसौढ़ी के सगुनी में सबसे ज्यादा तबाही, खेत बने तालाब, कटनी के ऐन वक्त पर बर्बाद हुई सालभर की मेहनत
शशि तुलस्यान
मसौढ़ी। पिछले तीन दिनों से लगातार जारी चक्रवाती तूफान और बारिश ने पटना जिले के मसौढ़ी प्रखंड में किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में पककर कटनी के लिए तैयार धान की फसल तेज हवा और बारिश के कारण जमीन पर बिछ गई है। खेतों में घुटने भर पानी जमा होने से फसल जलमग्न हो गई है। सालभर की मेहनत को अपनी आंखों के सामने बर्बाद होते देख किसान मायूस हैं। सबसे अधिक नुकसान मसौढ़ी के सगुनी गांव और आसपास के ग्रामीण इलाकों में हुआ है।
किसानों के अनुसार, धान की फसल पककर तैयार थी और कुछ ही दिनों में कटनी शुरू होने वाली थी। इसी बीच चक्रवाती हवा और मूसलाधार बारिश ने खेतों में खड़ी फसल को गिरा दिया। तेज हवा के कारण धान की बालियों सहित पौधे जमीन से चिपक गए हैं। लगातार बारिश से खेतों में तालाब जैसी स्थिति बन गई है। कई खेतों में पानी भर जाने के कारण फसल पूरी तरह डूब गई है।
सगुनी गांव में तबाही का मंजर सबसे भयावह है। यहां करीब दो दर्जन से अधिक गांवों के सैकड़ों बीघा खेतों में लगी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में चारों ओर गिरी हुई फसल और जमा पानी किसानों की परेशानी बयां कर रहा है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि धान की फसल गिरने के बाद अब उसके दोबारा खड़े होने की उम्मीद बेहद कम है। खेतों में लगातार पानी जमा रहने से पकी हुई धान की बालियां सड़ने और अंकुरित होने लगी हैं। इससे उपज की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित होने की आशंका है।
जगपुरा के सीताराम शर्मा और सुमन शर्मा, सगुनी के कारू प्रसाद एवं शिवनारायण प्रसाद, भैंसवां के सुरेश महतो, कृष्णा महतो और कैलाश महतो सहित सगुनी के पप्पू शर्मा, अजय शर्मा, संजय शर्मा, अखिलेश सिंह और शिवशंकर सिंह ने बताया कि उन्होंने खाद, बीज और मजदूरी के लिए कर्ज लेकर खेती की थी। इस वर्ष फसल अच्छी हुई थी और उम्मीद थी कि धान बेचकर कर्ज चुकाने के साथ परिवार की जरूरतें पूरी कर सकेंगे। लेकिन कटनी के ठीक पहले आए तूफान ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
किसानों ने बताया कि खेतों में अभी भी घुटने भर पानी जमा है। ऐसे में हार्वेस्टर से फसल काटना भी संभव नहीं हो पा रहा है। पानी निकलने तक फसल के और खराब होने की आशंका बनी हुई है।
प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के बाद किसान अब प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। किसानों ने कृषि विभाग और जिला प्रशासन से प्रभावित गांवों में तत्काल फसल क्षति का सर्वे कराने तथा उचित मुआवजा देने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते सरकारी सहायता नहीं मिली तो कर्ज लेकर खेती करने वाले परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। कटनी के ऐन वक्त पर हुई इस तबाही ने किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है। अब उनकी निगाहें प्रशासनिक सर्वे और मुआवजे की घोषणा पर टिकी हैं।