धान की रोपनी इंद्र भगवान के भरोसे
नवबिहार टाइम्स संवाददाता
दाउदनगर (औरंगाबाद)। प्रखंड में 12000 हेक्टेयर में धान की खेती होती है। अभी तक मात्र लगभग 360 हेक्टेयर में ही धान की रोपनी हुई है। कृषि विभाग का कहना है कि 15 जुलाई तक लगभग 15% तक धान की रोपनी हो जाती थी। इस बार यह मात्र 3% तक ही हो सकी है। महत्वपूर्ण है कि रोपनी का अंतिम समय 15 अगस्त है। यानी अब रोपनी के लिए एक महीने से भी कम का समय बचा है। यह रोपनी भी वहीं हुई है जहां सिंचाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध है। नहर और पंप सेट के भरोसे ही कुछ किसान धान की रोपनी कर सके हैं। अन्यथा पूरा इलाका इंद्र भगवान के भरोसे है। बारिश होगी तभी रोपनी होगी और तभी फसल अच्छी होगी।
रोहण पिछड़ा, कम होगी उपज

शमशेर नगर निवासी किसान एवं पूर्व जिला परिषद सदस्य रामकृष्ण कुमार उर्फ नन्हकू पांडेय का मानना है कि जिनके पास बोरिंग और नहर से पानी उपलब्ध होने की सुविधा है वही किसान धान की रोपनी थोड़ा बहुत कर सके हैं। रोहण वाला बिहन की बुआई पिछड़ रहा है। जब बुआई पिछड़ती है तो धान की उपज भी कम होती है। तीन नक्षत्र रोहिणी के अलावा मृदा और आद्रा में बिहन होता है। अब तक लगभग आधा रोपनी कार्य हो जाता था। बरसात न होने से यह स्थिति बनी है।
बोरिंग से पटवन, विवाद इस कारण

दुबे खैरा निवासी बड़े जोतदार सुनील दुबे का कहना है कि इस क्षेत्र में काफी जमीन सट्टा वाली है। यानी उन जमीन मालिकों को करहा से पटवन का अधिकार सरकार ने नहीं दिया है। नतीजा ऐसे किसान के पास बोरिंग से पटवन के अलावा कोई उपाय नहीं है, क्योंकि करहा से पानी ले जाने से नीचे वाले किसान रोकते हैं। कभी-कभी ऐसे ही कारणों से कहीं-कहीं विवाद भी देखने को मिलता है। इनका कहना है कि बारिश न होने के कारण बोरिंग से पटवन काफी महंगा पड़ता है। क्योंकि जो किसान बोरिंग से खेत का पटवन कर रहा होता है उसके आसपास के खेत भी सूखे होते हैं। नतीजा पानी अधिक चाहिए होता है।