पूर्णिया से ग्रीस का सफर: बिहार के कृषि-सशक्तिकरण का नया अध्याय
बेताब अहमद
पटना/पूर्णिया। बिहार का कृषि क्षेत्र वैश्विक पटल पर एक नया इतिहास रच रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में बिहार के किसानों की इस बड़ी उपलब्धि की जमकर सराहना की। प्रधानमंत्री ने देशवासियों को गर्व के साथ बताया कि बिहार के पूर्णिया जिले का फूल मखाना अब सात समंदर पार ग्रीस, यूरोप के बाजारों तक पहुंच चुका है।

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के सहयोग से हाल ही में पूर्णिया से एक टन फूल मखाने की पहली खेप ग्रीस भेजी गई थी। प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक पहल का जिक्र करते हुए कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना सिर्फ देश के भीतर खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला रही है। इसका सीधा आर्थिक लाभ बिहार के छोटे मखाना उत्पादकों और सीमांचल क्षेत्र के किसानों को मिल रहा है, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हो रही है और वैश्विक बाजार से जुड़ने के नए रास्ते खुले हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में पूर्णिया के मखाने के ग्रीस निर्यात होने का उल्लेख करना महज़ एक सरकारी आंकड़े का जिक्र नहीं है, बल्कि यह बिहार के कृषि क्षेत्र में आ रहे मूक बदलाव का शंखनाद है। बिहार का सीमांचल इलाका विशेषकर पूर्णिया, कटिहार, अररिया दुनिया का लगभग 80 से 90 प्रतिशत मखाना उत्पादित करता है। भौगोलिक संकेतक जीटी टैग मिलने के बाद से ही ‘मिथिला मखाना’ वैश्विक ब्रांड बनने की राह पर था, लेकिन पूर्णिया से एक टन की खेप सीधे यूरोप पहुंचना एक बड़ी छलांग है।
एपेडा जैसी संस्थाओं की यह सक्रियता दर्शाती है कि यदि बिहार के पारंपरिक हुनर और उत्पादों को सही लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग सपोर्ट मिले, तो यहाँ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है। प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य बिहार के नीति-नियंताओं और उद्यमियों के लिए एक इशारा है कि अब ‘लोकल’ को ‘ग्लोबल’ बनाने का समय आ चुका है।