बेताब अहमद
सासाराम। राजनीति में नियम और कानून अक्सर आम जनता की जेब और पेट देखकर तय होते हैं, कुछ ऐसा ही आरोप सासाराम में लगा है। राजद के पूर्व विधायक डॉ. अशोक कुमार के हालिया बयान ने सासाराम की सियासत में ‘मटन बनाम पाबंदी’ का नया अध्याय खोल दिया है।
सबसे मजेदार विरोधाभास मांझर कुंड को लेकर सामने आया है। आरोप है कि विधायक साहिबा वहां जाती हैं तो कानून की याद आती है और खाने-पीने पर ब्रेक लग जाता है। लेकिन जब सांसद जी वहां कदम रखते हैं, तो प्रशासन के सारे नियम मटन की खुशबू में उड़ जाते हैं। अब जनता यह समझने की कोशिश कर रही है कि जो पिकनिक स्पॉट आम लोगों के लिए प्रतिबंधित है, वह नेताओं के जलसे के लिए ‘वीआईपी लाउंज’ कैसे बन जाता है?
रोहतास जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मांझर कुंड पर पाबंदियों और क्षेत्र में विकास कार्यों के श्रेय को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राजद के पूर्व विधायक डॉ. अशोक कुमार ने राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा और सासाराम की स्थानीय विधायक स्नेहलता कुशवाहा पर सीधे निशाने साधे हैं।
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि सासाराम विधानसभा क्षेत्र में हुए पुराने विकास कार्यों का श्रेय लेने के लिए सांसद और विधायक दोनों (पति-पत्नी) के बीच होड़ मची है। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक तरफ क्षेत्र के विकास की बात की जा रही है, तो दूसरी तरफ फंड उत्तर प्रदेश में दिया जा रहा है। इसके अलावा, डॉ. अशोक कुमार ने पर्यटन स्थल मांझर कुंड के प्रबंधन पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि विधायक स्नेहलता कुशवाहा के दौरे के बाद वहां आम जनता के लिए खाने-पीने और अन्य पाबंदियां लगा दी गईं, जबकि उनके पति उपेंद्र कुशवाहा ने जिला प्रशासन के नियमों का उल्लंघन करते हुए वहां जलसा और मटन-चावल की पार्टी की। फिलहाल इस मामले पर कुशवाहा खेमे की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस बयान ने सासाराम की स्थानीय राजनीति में गरमाहट ला दी है।