उपेंद्र कश्यप
दाउदनगर (औरंगाबाद)। लगभग डेढ़ लाख की आबादी अपने इलाज के लिए जिस अस्पताल पर निर्भर है, उस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर डर-डर कर काम कर रहे हैं। इसमें 12 कमरे हैं और सभी जर्जर हैं। स्थिति इतनी बुरी है कि छत टूट कर गिरता रहता है और चिकित्सक उसके नीचे बैठकर इलाज करते हैं। जो ओपीडी है वहां चिकित्सा पदाधिकारी बैठकर मरीजों का इलाज करते हैं और कई बार ऐसा हो चुका है जब छत टूटकर नीचे गिरा है।

चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर अनमोल कुमार बताते हैं कि डर के बीच ही काम करते हैं। कई बार छत का प्लास्टर टूट कर गिरा है। लगभग 100 मरीज इलाज के लिए ओपीडी में आते हैं। इस कमरे में एसी नहीं है। डा. अनमोल कहते हैं कि पंखा इसलिए नहीं चलाते कि तपती दुपहरी में लू न मार दे।
ओपीडी के सटे ही है दवा खाना। जहां मरीजों को दवा मिलता है, और इसी कमरे में मरीजों का निबंधन होता है। यहां प्राय: तीन कर्मी बैठकर काम करते हैं। कर्मी मोहम्मद इस्माइल अंसारी कहते हैं कि डर लगता है। कई बार तो उनके अगल बगल में ही छत का प्लास्टर टूट कर गिरा है। ऐसी स्थिति महिला पुरुष और लेबर वार्ड में भी है।
डीएम और सीएस से पत्राचार
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. यतीन्द्र प्रसाद कहते हैं कि पुराना भवन है। सभी कमरे जर्जर हैं। इस स्थिति से जिला पदाधिकारी और सिविल सर्जन को अवगत कराया गया है। पत्राचार किया गया है। नया भवन बनाने की मांग की गई है।