बेताब अहमद
पटना। राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। साल 2011 के दरौंदा उपचुनाव के दौरान निषेधाज्ञा (धारा 144) लागू होने के बावजूद, बिना अनुमति लाउडस्पीकर बजाने और आदर्श आचार संहिता की धज्जियां उड़ाने के पुराने मामले में शुक्रवार को उन्हें सीवान कोर्ट में पेश होना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता और रसूख के बल पर चुनावी नियमों को नजरअंदाज करने की राजद की पुरानी कार्यशैली ही आज उनके लिए मुसीबत बनी हुई है। कोर्ट द्वारा लगातार गैर-जमानती वारंट और कुर्की के आदेश जारी होने के बाद, अब बीमारी की दलीलें छोड़ राजद सुप्रीमो को कानून के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ रहा है। विपक्ष इसे ‘कानून के राज’ की जीत और वीआईपी संस्कृति पर कड़ा प्रहार मान रहा है।
राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव गुरुवार शाम सीवान पहुंचेंगे। वे पचरूखी के एक होटल में रात्रि विश्राम करेंगे और शुक्रवार को 2011 के विधानसभा चुनाव से जुड़े आचार संहिता उल्लंघन के एक पुराने मामले में स्थानीय अदालत में पेश होंगे। दरौंदा थाना क्षेत्र में दर्ज इस मामले में लंबे समय से सुनवाई चल रही है, जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज है। उनके पचरूखी पहुंचने की खबर मात्र से ही जिले के पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता में भारी उत्साह देखा जा रहा है। राजद नेताओं का कहना है कि पार्टी प्रमुख हमेशा से न्यायपालिका का सम्मान करते आए हैं, लेकिन विपक्षी दल दशकों पुराने इस छोटे से मामले को भी राजनीतिक तूल देने की कोशिश कर रहे हैं। लालू जी के सीवान दौरे से क्षेत्र में राजद का जनाधार और मजबूत होगा और कार्यकर्ताओं का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
लेकिन लालू यादव का खुद सीवान आना और पचरूखी में रात्रि विश्राम करना महज एक अदालती चक्कर नहीं लगता। सीवान हमेशा से बिहार की राजनीति का एक बड़ा केंद्र रहा है। जानकारों का मानना है कि इस बहाने लालू प्रसाद यादव स्थानीय नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर क्षेत्र में राजद की राजनीतिक पकड़ और समीकरणों की समीक्षा करेंगे। अदालत की इस कार्यवाही पर न केवल कानूनी जानकारों की, बल्कि बिहार के तमाम राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं।