आयोग ने यह कार्रवाई बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 की धारा 18(1)(m) के तहत की है, जिसमें 04 अप्रैल 2008 के बाद दो से अधिक जीवित संतान होने पर चुनाव लड़ने की अयोग्यता का प्रावधान है।
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
भभुआ। राज्य निर्वाचन आयोग बिहार ने भभुआ नगर परिषद के मुख्य पार्षद विकास कुमार तिवारी को अयोग्य घोषित करते हुए उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश जारी किया है। आयोग ने यह कार्रवाई बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 की धारा 18(1)(m) के तहत की है, जिसमें 04 अप्रैल 2008 के बाद दो से अधिक जीवित संतान होने पर चुनाव लड़ने की अयोग्यता का प्रावधान है।

इस बात की जानकारी जिला पंचायती राज पदाधिकारी मनोज कुमार पवन ने दी। उन्होंने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी पत्र के आलोक में मुख्य पार्षद विकास तिवारी को पदमुक्त किए जाने से संबंधित पत्र उन्हें सौंप दिया गया है। उन्होंने बताया कि नामांकन के दौरान शपथ पत् में इस महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाए जाने के विरुद्ध मुख्य पार्षद के विरुद्ध नगर पालिक अधिनियम के सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बताया जाता है कि आयोग के समक्ष प्रस्तुत वाद में वादी जनेन्द्र कुमार आर्य ने आरोप लगाया था कि विकास तिवारी के चार संतान हैं, जिनमें से कम-से-कम एक की जन्मतिथि 04.04.2008 के बाद की है। जांच के दौरान प्रस्तुत अभिलेखों, विद्यालयीय दस्तावेजों और जन्मतिथि संबंधी प्रमाणों के आधार पर यह तथ्य पुष्ट हुआ कि तिवारी के तीन संतानों का जन्म उक्त तिथि के बाद हुआ है। आयोग ने पाया कि नामांकन पत्र में इस महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाया गया तथा शपथ पत्र में भ्रामक विवरण दिया गया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया।
उपलब्ध साक्ष्यों में मैट्रिक प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड और अन्य आधिकारिक दस्तावेज शामिल थे, जिन्हें विश्वसनीय मानते हुए आयोग ने प्रतिवादी के तर्कों को अस्वीकार कर दिया। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जन्मतिथि के संबंध में प्रस्तुत प्रमाणों का खंडन प्रतिवादी द्वारा नहीं किया गया, जिससे आरोप और मजबूत हो गए।
आदेश में कहा गया है कि विकास तिवारी अब मुख्य पार्षद पद के लिए अयोग्य हैं और उनका पद रिक्त माना जाएगा। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जिला पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे इस मामले में झूठा हलफनामा देने और तथ्य छिपाने के आरोप में विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा चार सप्ताह के भीतर आयोग को रिपोर्ट सौंपें। इधर इस फैसले के बाद नगर परिषद भभुआ की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और अब रिक्त पद पर नए चुनाव की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है।