नवबिहार टाइम्स संवाददाता
मसौढ़ी। प्रखंड के मध्य विद्यालय उस्मानचक में गुरुवार को मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर हंगामा हो गया। बच्चों को परोसी गई दाल में कीड़ा मिलने के बाद छात्रों ने खाना खाने से इनकार कर दिया और भोजन फेंक दिया। घटना की जानकारी मिलते ही अभिभावक विद्यालय पहुंच गए और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार को विद्यालय में बच्चों को पीएम पोषण योजना के तहत मध्यान्ह भोजन परोसा जा रहा था। इसी दौरान एक छात्र की थाली में दाल के अंदर कीड़ा दिखाई दिया। यह देखते ही अन्य बच्चों ने भी भोजन का विरोध शुरू कर दिया और अपनी-अपनी थालियां छोड़कर खाना फेंक दिया। देखते ही देखते विद्यालय परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई।
शोर-शराबा सुनकर पहुंचे अभिभावकों ने विद्यालय प्रशासन से जवाब-तलब किया। उनका आरोप था कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कभी दाल में कीड़ा तो कभी भोजन में कांच मिलने जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि विद्यालय में भोजन एनजीओ के माध्यम से केंद्रीय रसोईघर से तैयार होकर आता है। स्कूल में भोजन नहीं पकाया जाता है। उन्होंने बताया कि इससे पहले 24 और 29 जुलाई को भी भोजन में कीड़ा और कांच मिलने की शिकायत सामने आई थी।
प्रधानाध्यापक ने यह भी कहा कि पीएम पोषण योजना के तहत उपलब्ध कराए जा रहे भोजन में स्वाद की भी कमी रहती है। इसी कारण कई बच्चे भोजन नहीं करते और घर जाकर खाना खाते हैं। इससे विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि समय रहते भोजन की गुणवत्ता में सुधार नहीं किया गया तो किसी बच्चे के साथ बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी श्रीकुमार ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट जिला शिक्षा कार्यालय को भेजी जाएगी और यदि एनजीओ की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
घटना के बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश है। उन्होंने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा बच्चों को स्वच्छ, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनके स्वास्थ्य के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ न हो।