एक सप्ताह बाद बस्ता लेकर स्कूल पहुंचे बच्चे, जलजमाव वाले विद्यालयों में सुरक्षा के कारण नहीं शुरू हुई पढ़ाई
नवबिहार टाइम्स संवाददाता
मसौढ़ी। पुनपुन नदी का जलस्तर घटने के साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा है। बाढ़ के कारण करीब एक सप्ताह से बंद सरकारी स्कूलों में अब फिर से बच्चों की चहल-पहल शुरू हो गई है। प्रखंड के बाढ़ प्रभावित 51 सरकारी स्कूलों में से 34 स्कूलों में गुरुवार और शुक्रवार से पठन-पाठन शुरू करा दिया गया, जबकि 17 स्कूल अब भी बंद हैं। इन विद्यालयों के परिसर और कक्षाओं में पानी जमा रहने के कारण सुरक्षा को देखते हुए वहां पढ़ाई शुरू नहीं की गई है।
पुनपुन नदी में अचानक आई बाढ़ के कारण पिछले एक सप्ताह से प्रखंड के कई इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा। कई गांव टापू में तब्दील हो गए थे और एक गांव से दूसरे गांव का संपर्क टूट गया था। बड़ी संख्या में लोग घरों में ही रहने को मजबूर थे। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा और बाढ़ का पानी सरकारी विद्यालयों में प्रवेश करने के कारण 3 सितंबर से स्कूलों को बंद करना पड़ा था।
अब नदी का जलस्तर तेजी से नीचे आने और बाढ़ का पानी निकलने के बाद शिक्षा विभाग ने स्थिति के अनुसार विद्यालयों को दोबारा खोलने का निर्देश दिया है। करीब एक सप्ताह बाद बच्चे जब बस्ता लेकर स्कूल पहुंचे तो विद्यालय परिसरों में फिर से रौनक दिखाई दी। लंबे समय बाद अपने दोस्तों और शिक्षकों से मिलकर बच्चे भी उत्साहित नजर आए।
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुजीत कुमार ने बताया कि बाढ़ के कारण विद्यालयों को बंद किया गया था। जैसे-जैसे पानी निकल रहा है, वैसे-वैसे संबंधित प्रधानाध्यापकों को विद्यालय खोलकर पठन-पाठन शुरू कराने का निर्देश दिया जा रहा है। जिन स्कूलों में अभी भी जलजमाव है, उन्हें सुरक्षा कारणों से बंद रखा गया है।
उत्क्रमित मध्य विद्यालय पकौली में बाढ़ के बाद एक बार फिर पूरी रौनक लौट आई है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश कुमार ने बताया कि पानी निकलने के बाद विद्यालय परिसर की साफ-सफाई कराई गई। इसके बाद बच्चों की पढ़ाई शुरू करा दी गई है। एक सप्ताह बाद स्कूल पहुंचे बच्चे भी काफी खुश नजर आए।