नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
सासाराम। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और चेहरे पर मासूम मुस्कान होनी चाहिए, उस उम्र में वे भट्टी और बर्तनों की गर्द में अपना बचपन तलाश रहे थे। लेकिन गुरुवार को इन तीन मासूमों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया। श्रम विभाग रोहतास और बाल कल्याण समिति की तत्परता ने न केवल इन बच्चों को बाल श्रम की बेड़ियों से आजाद कराया, बल्कि उनके सूने होते भविष्य को फिर से संवारने की एक छोटी सी शुरुआत भी की है।
बचपन की आज़ादी और उम्मीद की किरण गुप्त सूचना के आधार पर श्रम विभाग रोहतास की टीम ने जिले के दो अलग-अलग ठिकानों पर औचक दबिश दी। छापेमारी के दौरान तीन बच्चों को काम करते हुए पाया गया, जिनकी आँखों में अनकही सहम और भविष्य का डर था। टीम ने बिना देर किए इन मासूमों को काम के दलदल से बाहर निकाला। पुनर्वास और संबल की ओर कदम रेस्क्यू के बाद सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
समिति ने संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की और प्रत्येक बच्चे को 3-3 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। यह राशि भले ही छोटी लगे, लेकिन यह उनके जीवन में एक नए पड़ाव का संबल है। अब दोबारा नहीं बुझेगा बचपन बाल कल्याण समिति ने कड़े निर्देश दिए हैं कि इन बच्चों को फिर कभी मजदूरी की भट्टी में नहीं झोंका जाएगा। अब इनका ठिकाना कोई दुकान या कारखाना नहीं, बल्कि एक सुरक्षित वातावरण और स्कूल का प्रांगण होगा, जहाँ वे शिक्षा की रोशनी से अपना भविष्य गढ़ सकें।
श्रम विभाग की इस मानवीय और सख्त कार्रवाई से बाल श्रम कराने वालों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने दोटूक चेतावनी दी है कि बच्चों के बचपन का सौदा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। प्रशासन अब बाल श्रम पर पूरी तरह सख्त हो चुका है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि जहाँ भी कोई मासूम मजदूरी करता मिला, वहाँ कानून का डंडा चलेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। श्रम विभाग और बाल संरक्षण की टीमें मिलकर हर कोने पर नजर रख रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों का असली ठिकाना काम की जगह नहीं, बल्कि स्कूल है। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे मूकदर्शक न बनें। जहाँ भी बाल श्रम देखें, तुरंत इसकी शिकायत करें ताकि इन मासूमों का भविष्य बर्बाद होने से बचाया जा सके।