बेताब अहमद
गोवा/ मुम्बई। भारतीय सिनेमा ने आज अपना एक ऐसा अनमोल हीरा खो दिया, जिसकी खनक हर दिल को चीर जाती थी। गोवा की शांत सुबह उस समय सहम गई जब मंचीय और फिल्मी दुनिया के बेताज बादशाह नाना पाटेकर ने खामोशी से हमेशा के लिए आँखें मूंद लीं। भले ही डॉक्टरों ने 45 मिनट तक उनकी सांसों को थामने की आखिरी कोशिश की, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। आज हर आँख नम है, क्योंकि स्क्रीन पर गुस्सा, बेबाकी और इंसानियत का अक्स दिखाने वाला वो फकीर अभिनेता अब हमारे बीच नहीं है। नाना पाटेकर सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, वे अभिनय की एक खुली किताब थे। ‘परिंदा’ की आग से लेकर ‘क्रांतिवीर’ के धमाकेदार संवादों और ‘वेलकम’ की कॉमेडी तक, उन्होंने हर विधा में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनका जाना सिर्फ एक उम्र का पड़ाव नहीं, बल्कि हिंदी और मराठी सिनेमा के उस दौर का अंत है जहाँ सादगी और गहराई को सबसे ऊपर रखा जाता था। कुछ दिन पहले ही डोना पाउला में उन्होंने जीवन का जो सच कहा था, वह आज उनकी खुद की जुबानी एक अकाट्य सच्चाई बन गया है।
जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीने वाले और समाज सेवा को अपना धर्म मानने वाले नाना पाटेकर ने कुछ ही दिन पहले कहा था— “पता नहीं मैं कल यहां रहूंगा या नहीं।” उनकी ये पंक्तियाँ आज भविष्य की भविष्यवाणी जैसी प्रतीत होती हैं। बिना किसी तामझाम के, अपनों से दूर गोवा के आशियाने में उनकी अंतिम सांसें इस बात की गवाही देती हैं कि जीवन अनिश्चित है। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें गोवा स्थित घर में कार्डियक अरेस्ट हुआ था। उन्हें करीब 45 मिनट तक CPR दी गई, लेकिन बचाया नहीं जा सका। अंतिम संस्कार पुणे के फॉर्महाउस में होगा। मणिपाल हॉस्पिटल के डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक नाना पाटेकर का सुबह 5:20 बजे निधन हुआ। घटना के वक्त नाना के साथ घर पर परिवार का कोई सदस्य नहीं था। उनके दोस्त और केयरटेकर मौजूद थे। अब शव का पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा।
नाना पाटेकर के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- कुछ ही अभिनेता ऐसे थे, जिनमें नाना पाटेकर जैसी गहराई, अलग पहचान और खास मौजूदगी थी। उन्होंने हर किरदार में शानदार विविधता और रचनात्मकता दिखाई। उनके निभाए किरदार कई पीढ़ियों तक याद किए जाएंगे।
अक्षय कुमार ने कहा- नाना जी के निधन की खबर से बहुत दुखी हूं। वह उन चुनिंदा कलाकारों में से एक थे, जिन्हें आपको रुककर देखने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ती थी। मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि मुझे उनके साथ (वेलकम) और फिर हाल ही में (हाउसफुल 5) में काम करने का मौका मिला। उन दोनों फिल्मों के सेट की बहुत सारी यादें हैं, जिन्हें मैं हमेशा अपने दिल के करीब रखूंगा।
रितेश देशमुख ने कहा- मेरे पास शब्द नहीं हैं। नाना पाटेकर जी के निधन की खबर से ऐसा लग रहा है, जैसे मुझ पर कोई ट्रक चढ़ गया हो। मैं बेहद दुखी हूं। वह एक बेहतरीन अभिनेता थे और उनका कोई मुकाबला नहीं था। वह पर्दे से बाहर भी हीरो थे। लोगों की भलाई के लिए उन्होंने अपनी चैरिटी के जरिए लगातार काम किया।
शिखर धवन ने कहा- भारतीय सिनेमा ने आज एक बेहद खास प्रतिभा को खो दिया है। नाना पाटेकर साहब, आपका काम आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। ॐ शांति।
‘वेलकम’ में उदय शेट्टी बनकर कॉमेडी में भी छाए
2007 में आई फिल्म ‘वेलकम’ में नाना पाटेकर ने गैंगस्टर उदय शेट्टी का किरदार निभाया था। इस कॉमेडी रोल को काफी पसंद किया गया। वे इसके सीक्वल ‘वेलकम बैक’ में भी उदय शेट्टी के किरदार में नजर आए।
फिल्म प्रहार के लिए मिलिट्री ट्रेनिंग ली थी
नाना पाटेकर ने फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में आर्मी मेजर की भूमिका निभाने के लिए भारतीय सेना की मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ सैन्य प्रशिक्षण लिया था। इस दौरान उन्होंने करीब तीन साल तक ट्रेनिंग की थी। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद नाना पाटेकर टेरिटोरियल आर्मी से जुड़े। उन्हें मानद कैप्टन के रूप में कमीशन मिला। बाद में उन्होंने लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद पद तक सेवाएं दीं और 2013 में रिटायर हुए।
कारगिल युद्ध के दौरान भी सेना के साथ रहे
नाना पाटेकर का सेना से जुड़ाव 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी सामने आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से विशेष अनुमति लेकर करीब 2 महीने सेना के साथ अग्रिम इलाकों में बिताए। इस दौरान वह द्रास, लेह, कुपवाड़ा और सोपोर जैसे क्षेत्रों में गए।
किसानों की मदद के लिए शुरू किया था ‘नाम फाउंडेशन’
नाना पाटेकर सिर्फ अपनी फिल्मों के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक कामों के लिए भी जाने जाते थे। किसानों और उनके परिवारों की मदद के लिए उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ 2015 में ‘नाम फाउंडेशन’ शुरू किया था। संस्था ने खास तौर पर महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों में किसानों की मदद के लिए काम किया। नाना ने किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद दी। उनके बच्चों की पढ़ाई में भी मदद की। कई परिवारों की स्कूल और कॉलेज फीस का खर्च उठाया गया। नाम फाउंडेशन ने गांवों में पानी की समस्या दूर करने के लिए भी काम किया। इसके तहत तालाब, कुएं और चेक डैम बनाने के साथ नदियों और नहरों को फिर से उपयोगी बनाने की कोशिश की गई। नाना से जुड़ा एक किस्सा यह भी है कि वह करीब 1.5 करोड़ रुपए की लग्जरी कार खरीदने वाले थे। किसानों की हालत देखकर उन्होंने कार खरीदने का फैसला बदल दिया और रकम जरूरतमंद परिवारों की मदद में लगा दी।
परिंदा’ में विलेन बने, 3 नेशनल अवॉर्ड
नाना पाटेकर ने 100 से ज्यादा फिल्में कीं। 1989 की फिल्म ‘परिंदा’ में नाना ने अन्ना का किरदार निभाया, जिसके लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। 1994 की ‘क्रांतिवीर’ के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। 1996 की ‘अग्निसाक्षी’ के लिए भी उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। इस तरह उन्हें करियर में 3 नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिले। भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए नाना पाटेकर को 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अपने लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने हिंदी के साथ मराठी फिल्मों में भी काम किया।