विधायकी रद्द कराने की सिफारिश बनाम नई पार्टी का ऐलान: जेडीयू और अनंत सिंह के बीच आर-पार की जंग
बेताब अहमद
पटना। पार्टी गई तो क्या, अपनी दुकान खोल लेंगे! जदयू से छह साल का ‘बहिष्कार’ झेलने के बाद अनंत सिंह बिल्कुल भी गमगीन नहीं हैं। उन्होंने ऐसा बयान दिया है मानों पार्टी से निकलना कोई सज़ा नहीं, बल्कि नया स्टार्टअप शुरू करने जैसा हो सीधा ऐलान, “हम अपनी पार्टी बना लेंगे। न गम, न फिक्र अनंत सिंह का नया शंखनाद! जदयू द्वारा बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद विधायक अनंत सिंह ने तेवर दिखाते हुए ऐलान किया है कि वे अपनी पार्टी बनाएंगे। उन्होंने पार्टी के फैसले को दरकिनार करते हुए अपनी ताकत का अहसास कराने की बात कही है।
जदयू से बाहर किए जाने से अनंत सिंह पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने आर-पार का ऐलान करते हुए कहा है कि वह खुद की नई पार्टी बनाएंगे और आगामी चुनाव में जदयू को 10 सीटों पर समेट कर रख देंगे। जनता मालिक है और जनता ही फैसला करेगी। उन्होंने साफ कहा है कि पार्टी से निकाले जाने का उन्हें कोई मलाल नहीं है और वे अब अपनी अलग पार्टी बनाएंगे। अनंत सिंह के इस कदम से बिहार की सियासत में नए समीकरण बनने के आसार हैं। अनंत सिंह ने मुस्कुराते हुए स्वीकार किया कि उन्हें इस फैसले से कोई दुख नहीं है। उन्होंने जनता के समर्थन पर भरोसा जताते हुए कहा कि अब वे अपनी खुद की पार्टी का गठन करेंगे।

पार्टी ने एमएलसी चुनाव (पटना ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र) के दौरान जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ जाकर जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन करने के कारण यह सख्त कार्रवाई की है। जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के आदेशानुसार, अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को पार्टी विरोधी गतिविधियों और विधान परिषद चुनाव में पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ काम करने के आरोप में 6 साल के लिए निष्कासित किया गया है। नीतीश कुमार और जेडीयू नेतृत्व इस पूरे मामले को पूरी तरह से ‘पार्टी के अनुशासन और सिद्धांतों’ के रूप में देख रहे हैं। नीतीश कुमार के नेतृत्व में जेडीयू इसे सीधे तौर पर ‘खुली बगावत’ के तौर पर देख रही है, जिसके कारण केवल पार्टी से 6 साल के लिए निकाला ही नहीं गया बल्कि उनकी विधायकी रद्द कराने के लिए भी विधानसभा अध्यक्ष से सिफारिश की गई है। जेडीयू ने संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल कानून) के तहत अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की भी सिफारिश विधानसभा अध्यक्ष से की है। यदि सदस्यता जाती है, तो मोकामा में उपचुनाव की स्थिति बनेगी।
जैसे ही निष्कासन की खबर आई, पटना और मोकामा में अनंत सिंह के समर्थकों ने इकट्ठा होकर आतिशबाजी की और खुशियां मनाईं। समर्थकों का मानना है कि पार्टी से बाहर होना उनके नेता के लिए एक नया अवसर है और वे किसी सिंबल के मोहताज नहीं हैं। समर्थकों का यह सोचना है कि मोकामा क्षेत्र में वोट किसी पार्टी जदयू या राजद को नहीं, बल्कि सीधे अनंत सिंह के नाम और उनके व्यक्तिगत प्रभाव पर पड़ता है। इसलिए नई पार्टी बनाने के फैसले का जनता के एक बड़े हिस्से ने स्वागत किया है। अनंत सिंह का मोकामा और आसपास के बाढ़, लखीसराय तथा मुंगेर बेल्ट में मजबूत प्रभाव माना जाता है। वे अपनी नई पार्टी या निर्दलीय ताकत के दम पर स्थानीय चुनावों और विधानसभा सीट पर जेडीयू के समीकरण बिगाड़ सकते हैं।

भले ही पार्टी ने अनंत सिंह पर यह कार्रवाई की है, लेकिन खुद अनंत सिंह ने बाहर निकलने के बाद नीतीश कुमार को लेकर कोई तीखा हमला नहीं किया है। उन्होंने साफ़ कहा कि “पार्टी तो नीतीश कुमार की थी, लेकिन अब वो सक्रिय भूमिका या स्वस्थ न रहने में नहीं हैं तो वर्तमान नेतृत्व में पार्टी खत्म हो चुकी है। अनंत सिंह ने यह भी जताया कि नीतीश कुमार के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध अभी भी ठीक हैं, लेकिन पार्टी चलाने वाले बाकी नेताओं ने मिलकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है। उन्होंने दावा किया है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में जेडीयू 10 से 12 सीटों पर सिमट जाएगी और पार्टी चलाने वालों को अपनी सही ‘औकात’ पता चल जाएगी।
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी अनंत सिंह के निष्कासन और पूरे घटनाक्रम को ‘नीतीश कुमार और जेडीयू की कमजोरी’ तथा ‘बिहार में नई राजनीतिक लहर’ के रूप में देख रही है जन सुराज का दावा है कि जेडीयू को यह अहसास हो गया है कि जमीन पर उनका जनाधार खिसक रहा है और पार्टी बिखरने की कगार पर है। जन सुराज का नजरिया है कि बिहार की जनता अब आरजेडी या जेडीयू-बीजेपी के पारंपरिक गठबंधनों से ऊब चुकी है और उनके विकल्प के तौर पर जन सुराज की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है, जिसके प्रभाव में बड़े-बड़े स्थापित चेहरे भी खिंचे चले आ रहे हैं।
आरजेडी ने जेडीयू के संविधान का हवाला देते हुए इस फैसले के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं। शक्ति यादव ने कहा कि किसी मौजूदा विधायक को निकालने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष का निर्देश अनिवार्य होता है, लेकिन यह पत्र प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की ओर से जारी किया गया है, जो जेडीयू में चल रही आंतरिक बेचैनी और नियमों की अनदेखी को दिखाता है। राजनीतिक रूप से जागरूक जनता का एक वर्ग यह मान रहा है कि बिहार में अब पारंपरिक दो-ध्रुवीय राजनीति एनडीए बनाम महागठबंधन के अलावा एक नया समीकरण उभर रहा है। जन सुराज की एंट्री और अनंत सिंह जैसे कद्दावर स्थानीय नेताओं का पारंपरिक पार्टियों से मोहभंग होना राज्य की जनता को आने वाले विधानसभा चुनावों में एक नए त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबले का संकेत दे रहा है।