दीपावली की तैयारी तेज, मिट्टी की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में दिन-रात जुटे मूर्तिकार
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। दीपावली पर्व को लेकर जिले में तैयारियां तेज होने लगी हैं। पर्व के नजदीक आते ही भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमाएं बनाने वाले कारीगर अपने काम में जुट गए हैं। मूर्तिकार मिट्टी से आकर्षक प्रतिमाएं तैयार करने में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। प्रतिमाओं को आकार देने से लेकर उनकी रंगाई-पुताई और सजावट तक का काम तेजी से किया जा रहा है। दीपावली के अवसर पर घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कारीगर विभिन्न आकार और डिजाइन की प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं।
प्रतिमाओं को आकर्षक रूप देने में जुटे कारीगर
कारीगर सबसे पहले मिट्टी से प्रतिमाओं का ढांचा तैयार करते हैं। इसके बाद प्रतिमाओं को सूखने के लिए रखा जाता है। सूखने के बाद रंगाई-पुताई कर उन्हें आकर्षक रूप दिया जाता है। मदनपुर में मूर्ति बना रहे कलाकार दिनेश प्रजापति, कुल्लू प्रजापति सहित ने बताया कि भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमाओं को पारंपरिक रंगों के साथ सजाया जा रहा है। कहीं प्रतिमाओं के वस्त्रों को रंगीन रूप दिया जा रहा है, तो कहीं मुकुट, आभूषण और अन्य सजावटी सामग्री के माध्यम से उनकी सुंदरता बढ़ाई जा रही है। कारीगरों का पूरा ध्यान इस बात पर है कि दीपावली से पहले प्रतिमाएं तैयार हो जाएं, ताकि दुकानदारों और ग्राहकों तक समय पर उनकी आपूर्ति की जा सके। पर्व के दौरान प्रतिमाओं की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए पहले से ही तैयारी की जा रही है।
दीपावली में लक्ष्मी-गणेश पूजन का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में दीपावली को सुख, समृद्धि और खुशहाली का पर्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपने घरों और प्रतिष्ठानों में माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता लक्ष्मी धन और समृद्धि की देवी हैं, जबकि भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और शुभ कार्यों का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि दीपावली के अवसर पर दोनों की प्रतिमाओं की विशेष मांग रहती है।
कारीगरों की मेहनत पर टिकी पर्व की तैयारी
दीपावली के अवसर पर प्रतिमाएं तैयार करने वाले कारीगरों के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण होता है। महीनों की तैयारी और लगातार मेहनत के बाद उनकी बनाई प्रतिमाएं बाजार तक पहुंचती हैं। प्रतिमाओं की बिक्री से होने वाली आमदनी पर कारीगरों की उम्मीदें टिकी रहती हैं। हालांकि, मिट्टी, रंग, सजावटी सामग्री और अन्य जरूरी सामान की लागत उनकी कमाई को प्रभावित कर सकती है। दीपावली जैसे पर्व स्थानीय कारीगरों की कला और पारंपरिक हस्तशिल्प को भी पहचान दिलाते हैं। मिट्टी से प्रतिमाएं बनाने की यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय रोजगार का भी माध्यम है।
बाजारों में बढ़ेगी रौनक
जैसे-जैसे दीपावली नजदीक आएगी, वैसे-वैसे बाजारों में पूजा सामग्री, दीपक, सजावटी सामान और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं की खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है। कारीगरों को आशा है कि इस बार भी लोग श्रद्धा के साथ प्रतिमाओं की खरीदारी करेंगे। फिलहाल मूर्तिकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं, ताकि दीपावली के अवसर पर श्रद्धालु अपने घरों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकें। दीपावली की चमक बढ़ाने में इन कारीगरों की मेहनत और पारंपरिक कला की अहम भूमिका है। मिट्टी से आकार लेती भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमाएं पर्व की तैयारियों के साथ लोगों की आस्था और उत्साह को भी दर्शा रही हैं।