रोहिणी आचार्य की पटना वापसी और तेजस्वी के साथ कड़वाहट के सियासी मायने
बेताब अहमद
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की करारी हार (महज 25 सीटें) के बाद शुरू हुआ पारिवारिक और राजनीतिक घमासान एक नए मोड़ पर आ गया है। चुनाव के बाद पार्टी में ‘जवाबदेही’ तय करने की मांग उठाकर मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव से सीधे टकराने वाली रोहिणी आचार्य करीब एक साल बाद सिंगापुर से पटना लौट आई हैं। नवंबर 2025 में भाई तेजस्वी यादव से नाराजगी के चलते “मेरा कोई परिवार नहीं है” कहकर बिहार छोड़ने वाली रोहिणी का पटना एयरपोर्ट पर लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने स्वागत किया।
हालांकि, मायके में पहली रात बिताने के बाद रोहिणी ने जो बयान जारी किया है, उसके गहरे सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर केवल अपने पिता लालू प्रसाद यादव को केंद्र में रखकर भावुक पोस्ट लिखी, लेकिन भाई तेजस्वी यादव का कोई जिक्र नहीं किया। सारण से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ चुकीं रोहिणी की यह वापसी क्या राजद के भीतर सत्ता संतुलन या फिर से अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश है, इस पर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं
करीब एक साल के लंबे अंतराल और दूरियों को पीछे छोड़ते हुए, पिता के स्नेह और आमंत्रण पर सिंगापुर से पटना एयरपोर्ट पहुंचीं रोहिणी का स्वागत स्वयं लालू प्रसाद यादव, उनकी मां राबड़ी देवी और बहन मीसा भारती ने गर्मजोशी से किया। पिछले कुछ महीनों में पारिवारिक और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उपजी दूरियों और चर्चाओं के बीच, रोहिणी की यह घर वापसी सभी गिले-शिकवों को मिटाकर पारिवारिक एकता का संदेश दे रही है। पटना पहुंचने के बाद रोहिणी ने सोशल मीडिया पर अपने पिता लालू प्रसाद यादव के साथ एक बेहद भावुक और प्यारा वीडियो साझा किया है।
इस वीडियो और अपने संदेश के जरिए रोहिणी ने यह साबित कर दिया है कि पिता और पुत्री के पावन रिश्ते के आगे हर गिले-शिकवे बेमानी हैं। उन्होंने लिखा, “पापा का हाथ थाम राहें आसान होती हैं, पापा की हर एक मुस्कान में मेरी जान बसती है, कोई शब्द नहीं, कोई शर्त नहीं, ये रिश्ता इतना पावन है।” साथ ही उन्होंने अपने पिता को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताते हुए लिखा कि इस जहान में उन्होंने पिता के आंचल से बढ़कर कुछ नहीं पाया है। अतीत के उतार-चढ़ाव और असहज स्थितियों को भुलाकर रोहिणी का अपने माता-पिता के सान्निध्य में लौटना यह दर्शाता है कि रिश्तों की गर्माहट और अपनों का प्यार हर दूरी और अनबन पर भारी पड़ता है।