नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
सीतामढ़ी। जिले के डुमरा थाना क्षेत्र के केथरिया गांव में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब जिला परिषद क्षेत्र संख्या-13 की सदस्य खुश्दिल देवी के पति बैद्यनाथ महतो की शनिवार सुबह अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। रोज की तरह बैद्यनाथ महतो सुबह टहलने निकले थे, तभी घात लगाए बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद इलाके में आक्रोश की आग भड़क उठी। गुस्साए ग्रामीणों ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। उग्र भीड़ ने मौके पर पहुंची पुलिस टीम पर भी हमला कर दिया। इस झड़प में ट्रैफिक थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका सिर फूट गया, जिन्हें आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया। इसके अलावा, आक्रोशित ग्रामीणों ने मुख्य आरोपी के घर को भी आग के हवाले कर दिया।

जानकारी के अनुसार, केथरिया गांव में जिला पार्षद खुश्दिल देवी के आवास पर 28 अगस्त की रात करीब 1:15 बजे बाइक सवार बदमाशों ने फायरिंग की। खौफनाक वारदात पुलिस की कार्यशैली पर सीधा सवाल खड़े कर रही है। हत्या से महज तीन दिन पहले, यानी 8 सितंबर को, केथरिया गांव के सैकड़ों ग्रामीण डुमरा थाना पहुंचे थे। वे 28 अगस्त की देर रात जिला पार्षद के आवास पर हुई गोलीबारी के मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों का आरोप था कि पुलिस की सुस्त और लापरवाह कार्रवाई के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, जिसका परिणाम आज इस बड़ी हत्या के रूप में सामने आया है। फिलहाल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
पुलिस की कथित सुस्ती और समय पर कार्रवाई न करने का खामियाजा एक बार फिर एक बेगुनाह को भुगतना पड़ा है। डुमरा थाना क्षेत्र में बैद्यनाथ महतो की बेरहमी से हत्या के बाद पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर पुलिस ने 28 अगस्त की रात जिला पार्षद के आवास पर हुई गोलीबारी के मामले को गंभीरता से लिया होता, तो आज बैद्यनाथ हमारे बीच जिंदा होते। गौरतलब है कि 28 अगस्त की रात करीब 1:15 बजे कुछ शराबियों ने विरोध करने पर जिला पार्षद के घर पर फायरिंग की थी। उस वक्त तो पुलिस ने महज खानापूर्ति की, जिससे अपराधियों के हौसले सातवें आसमान पर पहुंच गए। कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीणों ने 8 सितंबर को थाने पर प्रदर्शन भी किया था, लेकिन डुमरा थानाध्यक्ष मुकेश कुमार की नींद फिर भी नहीं खुली। इस लापरवाही का नतीजा तीन दिन बाद ही बैद्यनाथ की हत्या के रूप में सामने आया है।
फिलहाल इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, और ग्रामीणों के बीच एक बार फिर बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट तेज है। लेकिन पुलिस की इस कथित सुस्ती की कीमत बैद्यनाथ को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। हत्या की वजह क्या थी? हमलावर कौन थे? ये सवाल अभी भी हवा में तैर रहे हैं। पुलिस जांच का दावा तो कर रही है, लेकिन स्थानीय लोगों का भरोसा डुमरा पुलिस से पूरी तरह उठ चुका है। पुलिस अभी इस मामले की तहकीकात कर ही रही थी कि बैद्यनाथ महतो की हत्या से मामला और पेचीदा हो गया है। थानाध्यक्ष मुकेश कुमार की कार्यशैली को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल हत्या की स्पष्ट वजह और हमलावरों की पहचान के लिए पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार है, जबकि इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की पहली प्राथमिकता बनी हुई है।