वन विभाग से मुआवजे और सुरक्षा की मांग
नवबिहार टाइम्स संवाददाता
कौआकोल। प्रखंड क्षेत्र के नावाडीह गांव में गुरुवार की रात जंगली हाथियों के एक झुंड ने जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने गांव में प्रवेश कर एक घर को क्षतिग्रस्त कर दिया तथा कई किसानों की फसलों को रौंदकर भारी नुकसान पहुंचाया। घटना के बाद पूरे गांव में भय और दहशत का माहौल व्याप्त है।
जानकारी के अनुसार, देर रात हाथियों का झुंड गांव के दक्षिणी हिस्से में पहुंच गया और सबसे पहले मिथिलेश यादव के घर पर हमला कर दिया। हाथियों ने घर की दीवार तोड़ दी और अंदर रखे गेहूं, चावल तथा मसूर के बोरे बर्बाद कर दिए। पीड़ित मिथिलेश यादव ने बताया कि इस घटना में उन्हें 50 हजार रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। अचानक हाथियों के पहुंचने से परिवार के लोग किसी तरह जान बचाकर घर से बाहर निकले।
हाथियों का झुंड इसके बाद आसपास के खेतों की ओर बढ़ गया, जहां खड़ी फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचाया। श्रवण मिस्त्री की लगभग एक बीघा में लगी मूंग की फसल को हाथियों ने पूरी तरह रौंद दिया। वहीं किसान राजू यादव के खेत में लगी सब्जियों की खेती भी बुरी तरह नष्ट हो गई। किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने की स्थिति में थी और इस नुकसान से उन्हें भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी।
ग्रामीणों ने बताया कि हाल के दिनों में क्षेत्र में जंगली हाथियों की गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे किसानों और ग्रामीणों में लगातार भय बना हुआ है। रात के समय लोग खेतों और घरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। हाथियों के गांव में पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए, लेकिन सुरक्षा कारणों से किसी ने हाथियों को भगाने का प्रयास नहीं किया।
घटना के बाद पंचायत समिति सदस्य नोमिन्ता कुमारी तथा समाजसेवी शिक्षक अरुण कुमार ने प्रभावित परिवारों और किसानों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने वन विभाग एवं जिला प्रशासन से तत्काल क्षति का आकलन कर पीड़ितों को उचित मुआवजा देने की मांग की।
ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की आवाजाही पर निगरानी बढ़ाने, प्रभावित क्षेत्रों में विशेष टीम तैनात करने तथा लोगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में और अधिक जान-माल का नुकसान हो सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत प्रदान की जाए तथा हाथियों के आतंक से स्थायी सुरक्षा के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए, ताकि गांव के लोग भयमुक्त होकर अपना जीवन और खेती-बाड़ी का कार्य कर सकें।