नवबिहार टाइम्स संवाददाता
जंदाहा (वैशाली)। बिहार की साहित्यिक एवं बौद्धिक दुनिया के लिए वर्ष 2026 एक अपूरणीय क्षति लेकर आया है। प्रख्यात साहित्यकार, अनुवादक और विद्वान रघुनाथ प्रसाद सिंह के निधन पर विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। अप्रैल 2026 में उनके निधन के बाद साहित्य जगत में शोक की लहर है।
इस अवसर पर कैरियर मिशन चैरिटेबल ट्रस्ट एवं कैरियर मिशन कंप्यूटर एकेडमी, जंदाहा के संस्थापक डॉ. आनंद रंजन झा ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि रघुनाथ प्रसाद सिंह का योगदान केवल साहित्य तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने अपने ज्ञान, चिंतन और अनुवाद कार्यों के माध्यम से समाज को बौद्धिक रूप से समृद्ध करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
डॉ. झा ने बताया कि वर्ष 2018 में उन्हें गणेशदत्त परिषद् द्वारा प्रकाशित पुस्तक सर गणेशदत्त सिंह : एक जीवन परिचय की एक प्रति उपहार स्वरूप प्राप्त हुई थी। इस पुस्तक का अनुवाद स्वयं रघुनाथ प्रसाद सिंह ने किया था। पुस्तक के प्रथम पृष्ठ पर उनके हस्ताक्षर और आत्मीय संदेश आज भी उनके लिए अमूल्य धरोहर के रूप में सुरक्षित हैं।
उन्होंने कहा कि रघुनाथ प्रसाद सिंह भले ही शारीरिक रूप से अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनकी भाषा की संवेदना और उनका साहित्यिक अवदान सदैव जीवित रहेगा। उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।
डॉ. झा ने श्रद्धांजलि संदेश में कहा, “व्यक्ति का जीवन सीमित होता है, लेकिन उसका ज्ञान, उसका साहित्य और उसका लेखन कालजयी होता है। रघुनाथ प्रसाद सिंह आज हमारे बीच भले नहीं हैं, पर उनकी लेखनी आज भी जीवित है और आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी।”
उन्होंने कहा कि यह पुस्तक अब केवल एक जीवनी नहीं रह गई है, बल्कि रघुनाथ प्रसाद सिंह की स्मृतियों, उनके स्नेह और उनके साहित्यिक योगदान का जीवंत दस्तावेज बन चुकी है। उनके हस्ताक्षरों से अंकित यह प्रति ज्ञान, साहित्य और समर्पण की अमूल्य विरासत का प्रतीक है।
कैरियर मिशन चैरिटेबल ट्रस्ट परिवार ने दिवंगत साहित्यकार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त परिजनों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।