एनएच-139 फोरलेन संघर्ष समिति, औरंगाबाद ने दिया धरना
नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। औरंगाबाद-पटना राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-139) को फोरलेन बनाने की मांग को लेकर जिले में जनआंदोलन का स्वर तेज होता जा रहा है। एनएच-139 फोरलेन संघर्ष समिति, औरंगाबाद ने सोमवार को शहर के अनुग्रह मध्य विद्यालय के समीप धरना देकर बिहार के राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर इस महत्वपूर्ण सड़क को शीघ्र फोरलेन में परिवर्तित करने, प्रस्तावित बायपास योजना पर पुनर्विचार करने तथा सड़क सुरक्षा के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है।
समिति ने अपने ज्ञापन में एनएच-139 को “मौत का कुआं” बताते हुए कहा है कि सड़क की जर्जर और संकरी स्थिति के कारण पिछले दस वर्षों में औरंगाबाद जिले में करीब 2500 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में जान जा चुकी है। वहीं आईआरएडी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच औरंगाबाद-पटना मार्ग पर हर वर्ष औसतन 200 लोगों की मौत और लगभग 500 लोग घायल हुए हैं।
ज्ञापन में कहा गया है कि बिहार सरकार ने सभी जिला मुख्यालयों को पटना से फोरलेन सड़क मार्ग से जोड़ने की नीति बनाई थी, लेकिन औरंगाबाद एवं अरवल आज भी इस सुविधा से वंचित हैं। समिति का कहना है कि एनएच-139 बिहार को झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, जिस पर प्रतिदिन भारी संख्या में कोयला, पत्थर और अन्य मालवाहक वाहनों का आवागमन होता है।
समिति ने दावा किया है कि एनएचएआई के मानकों के अनुसार किसी दो लेन सड़क पर प्रतिदिन 12 हजार से अधिक वाहनों का परिचालन होने पर उसे फोरलेन में परिवर्तित किया जाना चाहिए, जबकि वर्तमान में इस मार्ग पर प्रतिदिन लगभग 40 हजार वाहनों का आवागमन हो रहा है। इसके बावजूद अब तक सड़क का चौड़ीकरण नहीं किया गया है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा वर्ष 2024 में गया में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एनएच-139 को फोरलेन बनाने के लिए 5,500 करोड़ रुपये की योजना की घोषणा की गई थी। हालांकि समिति का आरोप है कि बाद में एनएचएआई द्वारा पटना (नौबतपुर) से औरंगाबाद (अंबा) तक बायपास निर्माण की चर्चा शुरू कर दी गई, जिससे दुर्घटनाओं की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
संघर्ष समिति ने राज्यपाल से पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें एनएच-139 को फोरलेन बनाने के लिए केंद्र सरकार एवं एनएचएआई को निर्देशित करना, बायपास निर्माण योजना पर रोक लगाना, फोरलेन निर्माण तक रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक भारी वाहनों के परिचालन पर नियंत्रण, दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा तथा दोमुहान पुल पर वैकल्पिक पुल (डायवर्जन) का शीघ्र निर्माण शामिल है।
समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि समय रहते इस सड़क का चौड़ीकरण नहीं किया गया तो दुर्घटनाओं का सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने राज्य सरकार और केंद्र सरकार से जनहित में शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है।
समिति की ओर से कुमार सौरभ सिंह, ई. सुबोध कुमार सिंह, चुलबुल सिंह, रामानुज पांडेय, प्रेमेंद्र मिश्र, रामकेवल सिंह, मनोज कुमार सिंह, अरविंद कुमार सिंह, नंदकिशोर यादव, कमलेश कुमार सिंह, नवीन कुमार सिंह, दिलीप कुमार सिंह, सुचित कुमार सिंह सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय नागरिकों ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर इस मांग का समर्थन किया है। जिले के लोगों का मानना है कि एनएच-139 का फोरलेन निर्माण न केवल सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाएगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और औद्योगिक विकास को भी नई गति देगा।