नवबिहार टाइम्स ब्यूरो
औरंगाबाद। बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत जिला परिषद नियोजित माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक तथा पुस्तकालयाध्यक्ष पिछले तीन माह से अधिक समय से वेतन के बिना कार्य करने को मजबूर हैं। वेतन मद में अब तक आवश्यक राशि का आवंटन जारी नहीं होने से हजारों शिक्षकों और उनके परिवारों के समक्ष गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
औरंगाबाद जिला परिषद नियोजित माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सत्येंद्र नारायण सिंह और उपाध्यक्ष डॉ. राकेश रंजन ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर राज्य सरकार से तत्काल लंबित वेतन भुगतान की मांग की है। संघ का कहना है कि एक ओर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर शिक्षक लगातार तीन माह से अधिक समय से वेतन के अभाव में आर्थिक, मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वेतन भुगतान में लगातार हो रही देरी के कारण शिक्षकों के परिवारों का सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। घर-परिवार का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, बैंक ऋण की किश्तें, चिकित्सा व्यय और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है। कई शिक्षक गंभीर आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं, जबकि कुछ मामलों में इलाज तक प्रभावित होने की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
उन्होंने कहा कि तमाम कठिनाइयों के बावजूद शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी जायज मांगों की अनदेखी की जा रही है। संघ का मानना है कि यह स्थिति न केवल शिक्षकों के मनोबल को प्रभावित कर रही है, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य पर भी प्रतिकूल असर डाल सकती है।
संघ ने सरकार को आगाह करते हुए कहा कि आर्थिक असुरक्षा और मानसिक तनाव से जूझ रहे शिक्षकों से बेहतर शैक्षणिक परिणाम की अपेक्षा करना उचित नहीं है। शिक्षा व्यवस्था की मजबूती का आधार शिक्षक हैं और उनकी उपेक्षा कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकता।
संघ के अनुसार, इस संबंध में शिक्षा मंत्री तथा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर अविलंब वेतन मद में आवश्यक राशि का आवंटन जारी करने की मांग की गई है। साथ ही लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है ताकि शिक्षकों और उनके परिवारों को राहत मिल सके तथा विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों।